कृषिमंत्री भरणे संगमनेर पहुंचे, सोयाबीन के नुकसान का जायजा लिया, मदद का भरोसा दिया
महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात के बीच कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे सीधे खेत की मेड़ पर पहुंचे और किसानों को सरकारी मदद का भरोसा दिया।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इस बार बारिश की कमी की वजह से सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इसी बीच राज्य के कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे खुद संगमनेर तालुका के पिंपळे गांव पहुंचे और किसान सोपान चकोर के खेत की मेड़ पर जाकर नुकसान का जायजा लिया। बारिश न होने से यहां सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी, यह देखकर मंत्री ने किसान को दिलासा दिया।
कृषिमंत्री भरणे ने कहा कि वे खुद किसान परिवार से आते हैं, इसलिए किसानों का दर्द और उनकी मुश्किल हालत उन्होंने खुद भोगी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों के दुख में उनके साथ खड़ी है और हर तरह की मदद के लिए मजबूती से साथ रहेगी। पीक विमा यानी फसल बीमा और कर्जमुक्ति योजनाओं का फायदा प्राथमिकता के आधार पर देने के लिए सरकार किसानों के साथ पूरी तरह खड़ी है, यह बात उन्होंने साफ कही।
पिंपळे गांव के कुछ किसानों को फसल बीमा में जो दिक्कतें आ रही थीं, उसका तुरंत संज्ञान लेते हुए मंत्री ने कृषि और महसूल विभाग को साफ निर्देश दिए कि चालू खरीफ सीजन में ही इस पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिया कि सूखे जैसे मुश्किल हालात में किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहना प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसलिए अधिकारी खुद किसानों के खेत की मेड़ तक जाकर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। खेती, पशुपालन, चारा और पानी की किल्लत को लेकर तुरंत उपाय करने के भी निर्देश दिए गए।
मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के आपत्ति प्रबंधन विभाग और राज्य सरकार के मदद व पुनर्वसन विभाग के तहत किसानों की हर तरह से मदद के लिए पूरी अधिसूचना जल्द ही सरकार की तरफ से जारी की जाएगी, जिसमें सभी तरह की मदद शामिल होगी। पानी की सप्लाई में दिक्कत न हो, इसके लिए उन्होंने महावितरण विभाग को डीपी और ट्रांसफार्मर समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
जिला कृषि अधीक्षक अधिकारी सुधाकर बोराळे ने अहिल्यानगर जिले की बुवाई और फसल हालात की जानकारी दी। बारिश के अंतराल की वजह से मूंग की 47.83% और उड़द की 61.45% बुवाई हुई है। कपास की 91.66% बुवाई हुई है और फसल फूल-फल आने की अवस्था में है, लेकिन बारिश न होने से बढ़वार रुक गई है और फूल-कलियां झड़ रही हैं। कुछ जगह रस चूसने वाले कीड़े और गुलाबी बोंडइल्ली का प्रकोप भी देखा गया है। सोयाबीन की 113.03% बुवाई हुई है और फसल फली भरने की संवेदनशील अवस्था में है, पानी की कमी से फलियां चपटी और दाने बारीक रह सकते हैं, साथ ही हल्की जमीन वाली फसलें सूखने का खतरा है।
मक्का की 163.34% बुवाई हुई है और फसल कणसे भरने की अवस्था में है, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से वजन में बड़ी गिरावट आ सकती है। तुअर की 134.32% बुवाई हुई है और पानी की कमी से बढ़वार रुकी है। खरीफ बाजरा की 63.83% बुवाई हुई है और बारिश के अंतराल से फसल सूख गई है।
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