बुधवार, 16 सितमबर 2026

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23:26 IST

बुलढाणा: कम बारिश के बाद अब जंगली जानवरों ने भी फसलों को बनाया निशाना

बुलढाणा जिले में देर से आई बारिश के बाद अब रोही, नीलगाय, हिरण और बंदर जैसे जंगली जानवर खेतों में घुसकर कच्ची फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की रखवाली बढ़ गई है।

बुलढाणा: कम बारिश के बाद अब जंगली जानवरों ने भी फसलों को बनाया निशाना
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बुलढाणा जिले के किसानों के लिए इस साल का खरीफ सीजन अभी तक राहत लेकर नहीं आया है। रोहिणी और मृग नक्षत्र में बारिश ने आंख दिखाई और मानसून जिले में देर से पहुंचा, जिसकी वजह से खरीफ की बुआई में भी देरी हुई। शुरुआत में बारिश ठीकठाक लग रही थी, लेकिन जब फसलें जोर पकड़ रही थीं तभी बारिश गायब हो गई। फूल और फली की अवस्था में पहुंची फसलों को बचाने के लिए किसान जो भी सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, उनसे पानी देने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

एक तरफ किसान फसल बचाने की कोशिश में लगे हैं, तो दूसरी तरफ खेतों में जंगली जानवरों के झुंड कच्ची फसल पर हमला बोल रहे हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जिले में किसानों का मुख्य धंधा खेती ही है और यह पूरी तरह से मौसम पर निर्भर होने की वजह से कभी अच्छे दिन दिखाती है तो कभी संकट भी लाती है। इस बार मानसून की बारिश दो हफ्ते देर से आई, बुआई लेट हुई और पिछले डेढ़ महीने से बारिश गायब है। ऊपर से कीड़ों का प्रकोप भी किसानों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बारिश नहीं आ रही, कीड़ों का प्रकोप कम नहीं हो रहा और मानो यह संकट कम था कि अब कच्ची फसल में रोही, नीलगाय, हिरण और बंदर जैसे जानवरों का खुलेआम घूमना फसलों की बर्बादी की एक और वजह बन गया है।

सरकार की तरफ से नुकसान भरपाई के नाम पर मिलने वाली मदद भी बहुत कम है। पांगरी उबरहंडे के किसान गणेश देशमुख ने गुस्से में कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाता है। एक तरफ बाजार में सही दाम नहीं मिलता, दूसरी तरफ जंगली जानवर फसल का भारी नुकसान कर देते हैं। नुकसान भरपाई के लिए वन विभाग में अर्जी देने पर कागजी कार्रवाई का लंबा सिलसिला शुरू हो जाता है, फिर भी वन विभाग बहुत कम मदद देकर किसानों को टरका देता है।

मेरा खुर्द के किसान रामदास मुजुमले ने बताया कि पिछले दो-तीन साल से खेती से जितनी कमाई होनी चाहिए, उतनी नहीं हो रही। जो भी उत्पादन होता है उसे बाजार में सही भाव नहीं मिलता, इसलिए हर साल कर्ज लेकर ही बुआई करनी पड़ती है। कभी मौसम साथ देता है तो कभी सब कुछ छीन लेता है। अगर फसल अच्छी आ भी जाए तो खेतों में रोहियों के झुंड घुसकर उत्पात मचाते हैं, जिससे फसल का नुकसान होता है। उन्होंने मांग की कि खेतों में घुसने वाले इन जंगली जानवरों पर वन विभाग को रोक लगानी चाहिए।

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