शिंदे पर आलोचना हुई तो साथ देंगे, सरनाईक का जरांगे को लेकर भी स्पष्टीकरण
मनोज जरांगे पाटील ने अपना उपोषण वापस लेकर सरकार को तीन महीने का टाइम दिया है, और इसी के बाद मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सियासी हलचल फिर तेज हो गई है। इसी बीच मंत्री प्रताप सरनाईक ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने एकनाथ शिंदे पर हो रही आलोचना और जरांगे पाटील को लेकर अपनी भूमिका साफ की।
सरनाईक ने कहा, 'शिंदे हमारे नेता हैं। उन्हें अगर कोई कुछ बोलेगा तो हम उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।' उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब जरांगे पाटील और शिंदे के बीच शाब्दिक टकराव की चर्चा चल रही है, इसलिए सरनाईक के इस वक्तव्य को लेकर अब बातें होने लगी हैं।
वहीं मनोज जरांगे पाटील को लेकर बात करते हुए सरनाईक ने आक्रामक रुख नहीं अपनाया, बल्कि सफाई दी। उन्होंने कहा, 'जरांगे पाटील के बारे में हमने कोई गलत शब्द इस्तेमाल नहीं किया है। वो भी हमारे समाजबांधव हैं।' साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि आने वाले तीन महीनों में जरांगे पाटील की मांगों पर सरकार जरूर विचार करेगी।
बता दें, जरांगे पाटील ने आंदोलन के दौरान हैदराबाद गजट समेत मराठा आरक्षण की अलग-अलग मांगों पर अपनी भूमिका रखी थी। सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद आखिरकार उन्होंने अपना उपोषण वापस लिया और सरकार को तीन महीने का समय दिया।
इसी दौरान सरनाईक ने जिला नियोजन समिति की बैठक में गैरहाजिर रहे विधायकों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सूखे की स्थिति को देखते हुए टंचाई आराखडा तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। सरनाईक ने साफ कहा कि इस तरह की जरूरी बैठकों में जनप्रतिनिधियों का हाजिर रहना जरूरी है।
उन्होंने तानाजी सावंत समेत चार और विधायकों की गैरहाजिरी पर भी नाराजगी जताई। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि 17 सितंबर को मनाए जाने वाले मराठवाडा मुक्तिसंग्राम दिवस के ध्वजारोहण जैसे अहम कार्यक्रमों में सभी जनप्रतिनिधि मौजूद रहें।
एक तरफ जरांगे पाटील ने सरकार को तीन महीने का समय दिया है, तो दूसरी तरफ शिंदे के मंत्रियों की तरफ से उनके बयानों पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले तीन महीनों में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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