शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

बुलढाणा में सूखती तूर, कपास और हल्दी को एक बार सिंचाई का पानी देने पर प्रशासन राजी

बुलढाणा में सूखती तूर, कपास और हल्दी को एक बार सिंचाई का पानी देने पर प्रशासन राजी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

बारिश की खींच से खरीफ की फसलें संकट में हैं। परियोजनाओं में पीने के पानी का भंडार रखकर बाकी पानी एक बार सिंचाई के लिए देने पर प्रशासन ने सकारात्मक रुख अपनाया है।

इस साल बारिश ने लंबी खींच ली है और बुलढाणा जिले में खरीफ सीजन की फसलें मुश्किल में आ गई हैं। कई जगह पानी न मिलने से खड़ी फसलें सूखने लगी हैं और किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में किसानों के लिए राहत भरा फैसला सामने आया है। प्रशासन ने सकारात्मक भूमिका ली है कि जिले की परियोजनाओं में पीने के पानी के लिए जरूरी भंडार रखने के बाद जो पानी बचेगा, वह तूर, कपास और हल्दी की फसलों को एक बार सिंचाई के लिए दिया जाए।

कम बारिश की वजह से जिले के कई किसानों की खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। कुछ जगहों पर फसलें पूरी तरह सूखने की कगार पर हैं। किसानों की मांग थी कि कम से कम एक बार पानी मिल जाए तो फसलों को जीवनदान मिल सकता है।

इस मांग को देखते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने पहल की। उन्होंने जिलाधिकारी डॉ. प्रविणकुमार देवरे और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और उपलब्ध जल भंडार का जायजा लिया।

इस बैठक में अध्ययन किया गया कि जिले की परियोजनाओं में कितना पानी है, आगे पीने के पानी की कितनी जरूरत पड़ सकती है और भाप बनकर उड़ने यानी वाष्पीकरण से कितना पानी घट सकता है। पीने के पानी की जरूरत और संभावित पानी की कमी के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त पानी का भंडार भी रखा जाएगा। उसके बाद जो पानी बचेगा, उसे खेती के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।

सिर्फ फसलों का ही नहीं, जानवरों के चारे का सवाल भी गंभीर हो गया है। इसलिए पशुधन के चारे के लिए भी परियोजनाओं से पानी चरणबद्ध तरीके से छोड़ने पर प्रशासन ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

प्रतापराव जाधव ने किसानों से अपील की है कि मिलने वाले पानी का इस्तेमाल बहुत किफायत से करें। उन्होंने सूचना दी है कि यह पानी सिर्फ मौजूदा खरीफ फसलों और चारे की जरूरत के लिए इस्तेमाल हो। रब्बी सीजन की फसलों के लिए इस पानी का उपयोग न किया जाए।

कुल मिलाकर, बारिश न होने से संकट में फंसे बुलढाणा के किसानों को इस फैसले से कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है। फिर भी असल में कितना पानी मिलेगा और किस परियोजना से कब पानी छोड़ा जाएगा, इस पर किसानों की नजर टिकी हुई है।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे