महाराष्ट्र में दुष्काळ कैसे घोषित होगा, सरकार ने तय किए पांच वैज्ञानिक मानदंड
राज्य सरकार ने सुधारित दुष्काळ व्यवस्थापन संहिता 2026 के तहत दुष्काळ तय करने की तीन चरण वाली प्रक्रिया और मानदंड जारी किए हैं।
महाराष्ट्र में अब दुष्काळ घोषित करने के लिए पांच वैज्ञानिक मानदंड और तीन चरणों की कार्यपद्धति तय की गई है। यह जानकारी मदत व पुनर्वसन मंत्री मकरंद जाधव पाटील ने दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की सुधारित दुष्काळ व्यवस्थापन संहिता, 2026 के आधार पर दुष्काळ की स्थिति तय की जाएगी।
जिन पांच मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन होगा उनमें पर्जन्यमान यानी बारिश, वनस्पती निर्देशांक, पेरणी यानी बुवाई का क्षेत्र, मृदा यानी मिट्टी की नमी और भूजल स्तर शामिल हैं। इसके अलावा चारे की उपलब्धता, पीने के पानी की किल्लत, रोजगार की मांग और पलायन जैसे सामाजिक-आर्थिक कारकों को भी ध्यान में रखा जाएगा, ऐसा मंत्री ने बताया।
असली मायने में जमीनी सर्वे में अगर फसल का नुकसान 33 प्रतिशत से ज्यादा पाया जाता है, तो वह गांव दुष्काळग्रस्त घोषित होने के लिए पात्र माना जाएगा।
दुष्काळ तय करने की प्रक्रिया तीन चरणों में होगी। पहले चरण में बारिश से जुड़े अनिवार्य निर्देशांकों की जांच होगी। दूसरे चरण में दुष्काळ की गंभीरता तय की जाएगी। और तीसरे चरण में असली जमीनी सर्वे और पड़ताल की जाएगी।
खरीप सीजन के लिए दुष्काळ घोषित करने पर फैसला अक्टूबर में लिया जाएगा, जबकि रबी सीजन के लिए 31 मार्च तक की मुदत तय की गई है। जिन गांवों में दुष्काळ की वजह से पीने के पानी की किल्लत होगी, वहां लोकल और क्षेत्रीय स्तर पर फौरन टैंकर शुरू करने के अधिकार दिए गए हैं।
राज्य स्तर पर कृषी आयुक्त की अध्यक्षता में, और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दुष्काळ पर नजर रखने वाली कमेटियां बनाई गई हैं। महसूल विभाग खरीप की स्थिति की समीक्षा करेगा, और उसके बाद कैबिनेट बैठक में सिफारिशें रखी जाएंगी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित किसान मदद से वंचित नहीं रहेंगे।
इसी बीच परभणी में खेतों की फसलें सूख जाने से दुष्काळ घोषित कर किसानों को आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने मानवत में दो घंटे रास्ता रोको आंदोलन किया।
राज्य के कई हिस्सों में बारिश ने दगा दिया है, जिसके चलते विपक्ष तुरंत दुष्काळ घोषित करने की मांग कर रहा है। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि दुष्काळ की औपचारिक घोषणा करना और दुष्काळ निवारण के उपाय शुरू करना, ये दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपत्ती प्रतिसाद निधी यानी एनडीआरएफ के मानदंडों के मुताबिक दुष्काळ औपचारिक रूप से घोषित करने से पहले कुछ प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी होती है, उसके बाद ही केंद्र से मदद मांगी जा सकती है।
फडणवीस ने आगे कहा कि बारिश ना होने से जिन इलाकों में फसलों का नुकसान हुआ है, वहां सरकार ने फौरन उपाय शुरू कर दिए हैं। राज्य सरकार केंद्र की मदद का इंतजार करके नहीं बैठती, बल्कि राज्य के अपने फंड से किसानों को जरूरी मदद देने की प्रक्रिया शुरू की जाती है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
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