तोतलाडोह में सिर्फ 34% पानी, नागपुर में 10% जलकटौती की तैयारी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर महानगरपालिका राज्य सरकार के निर्देश के बाद पानी की सप्लाई में 10% कटौती पर विचार कर रही है। तोतलाडोह में जलस्तर पिछले साल के 93.90% से गिरकर 34.36% रह गया है।
नागपुर शहर में पानी की सप्लाई घटाने की नौबत आती दिख रही है। जलाशयों में पानी तेजी से कम हो रहा है और इससे शहर के पीने के पानी पर दबाव बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार पहले ही स्थानीय निकायों को पानी की खपत 10% कम करने को कह चुकी है। अब नागपुर महानगरपालिका (NMC) तय कर रही है कि कटौती कितनी की जाए, क्योंकि इसका असर शहर के घरों पर पड़ सकता है।
प्रभारी मंत्री और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले शनिवार को रिव्यू मीटिंग लेंगे। इसमें जलाशयों की हालत देखी जाएगी और यह भी परखा जाएगा कि शहर इस कमी से निपटने के लिए कितना तैयार है। महापौर नीता ठाकरे ने संकेत दिया है कि पानी की कटौती पर फैसला जल्द होगा। हालांकि प्रशासन अभी यह देख रहा है कि लोगों को ज्यादा तकलीफ दिए बिना सप्लाई कितनी घटाई जा सकती है।
ठाकरे ने कहा, "सरकार ने पानी की कटौती को लेकर निर्देश दिए हैं। प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले शनिवार को हालात की समीक्षा करेंगे। पानी की कटौती पर फैसला लेना ही होगा, लेकिन हम यह देख रहे हैं कि कितनी कमी की जा सकती है।"
राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर से सप्लाई में 10% की कटौती का निर्देश दिया था। NMC ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। लेकिन पिछले साल के मुकाबले जलाशयों का स्तर काफी गिर गया है, इसलिए इस मसले को टालना मुश्किल होता जा रहा है।
सरकार का यह निर्देश कम बारिश और पानी की उपलब्धता पर अल नीनो के संभावित असर की चिंता के बाद आया है। स्थानीय निकायों से कहा गया है कि वे पीने के पानी की जरूरत को सबसे ऊपर रखें, आपातकाल के लिए 10% पानी रिजर्व रखें और 31 अगस्त 2027 तक जल-प्रबंधन के उपाय लागू करें।
नागपुर को अभी तोतलाडोह और कन्हान नदी से रोजाना करीब 740 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) साफ किया हुआ पानी मिलता है। इसमें 10% की कटौती का मतलब है रोज करीब 74 MLD कम पानी। प्रशासन के लिए यह बड़ी चुनौती होगी।
एक बड़ी चिंता नॉन-रेवेन्यू वॉटर (NRW) की है, यानी पाइपलाइन के रिसाव, अनधिकृत कनेक्शन और वितरण की खामियों में जाने वाला पानी। शहर की कुल सप्लाई का लगभग 35%, यानी करीब 259 MLD, इसी श्रेणी में आता है। महानगरपालिका का दावा है कि लीक पाइपलाइनों की मरम्मत और अनधिकृत कनेक्शन नियमित करने से वह रोज करीब 50 MLD बचा रही है। फिर भी असली और टिकाऊ बचत ही तय करेगी कि उपभोक्ताओं की सप्लाई में बड़ी कटौती टल पाती है या नहीं।
जलाशयों की तस्वीर चिंताजनक है। नागपुर के मुख्य स्रोत तोतलाडोह में लाइव स्टोरेज डिजाइन क्षमता का सिर्फ 34.36% रह गया है। पिछले साल इसी तारीख को यह 93.90% था। खिंडसी में अभी 36.37% पानी है, जबकि एक साल पहले 90.53% था। कामठी खैरी में 57.34% पानी है, जो पिछले साल इसी समय 72.10% था।
तोतलाडोह और खिंडसी में इतनी गिरावट बताती है कि नागपुर की जल सप्लाई व्यवस्था कितनी कमजोर होती जा रही है और पानी बचाने के उपाय तुरंत जरूरी हैं।
NMC का भरोसा वितरण का नुकसान घटाने और गैरजरूरी खपत रोकने पर है। इसमें पाइपलाइन की मरम्मत तेज करना, अवैध कनेक्शन नियमित करना और गाड़ी धोने या सड़क साफ करने जैसे कामों में पीने का साफ पानी इस्तेमाल करने से लोगों को रोकना शामिल है। लेकिन 259 MLD पानी NRW में गिना जा रहा है, इसलिए इन उपायों के असर पर कड़ी नजर रहेगी। प्रशासन को दिखाना होगा कि बेहतर वितरण से असल में कितना पानी बच सकता है और क्या वह प्रस्तावित कटौती की भरपाई कर पाएगा।
शनिवार की रिव्यू मीटिंग से तय होने की उम्मीद है कि आगे क्या किया जाए, यानी कटौती कब और कितनी होगी। NMC के सामने मुश्किल संतुलन है: तेजी से घटते जलाशयों का पानी बचाना और साथ ही लोगों को पीने का पर्याप्त पानी देते रहना। जब तक जलाशयों का स्तर काफी नहीं सुधरता, नागपुर को लंबे समय तक पानी के सख्त प्रबंधन के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
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