कृषिमंत्री दत्तात्रेय भरणे खामगाव पहुंचे, किसानों से मिलकर जाना सूखे का हाल
महाराष्ट्र के कृषिमंत्री दत्तात्रेय भरणे ने खामगाव तालुका के पिंप्राळा गांव में खेतों पर जाकर फसलों का हाल देखा, वहीं कांग्रेस और सत्याग्रह किसान संगठन ने रास्ते में उनका काफिला रोककर मुआवजे की मांग रखी।
महाराष्ट्र के कृषिमंत्री दत्तात्रेय भरणे रविवार को खामगाव तालुका के पिंप्राळा गांव पहुंचे और सीधे किसानों के खेत की मेड़ पर जाकर फसलों का जायजा लिया। बारिश में लंबे अंतराल की वजह से फसलों पर क्या असर पड़ रहा है, यह उन्होंने किसानों से खुद बातचीत करके समझा। इस दौरान उन्होंने किसानों की दिक्कतें और खेती की मौजूदा हालत भी सुनी।
राज्य सरकार ने सभी तालुकों में बारिश, पानी और फसलों की असली स्थिति का जायजा लेकर तुरंत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत प्रशासन खेत-खलिहानों में जाकर हालात का मुआयना कर रहा है। इस पूरी कवायद में फसलों की हालत, पानी की उपलब्धता और किसानों के सामने आ रही मुश्किलों को समझने पर जोर दिया जा रहा है। पिंप्राळा में मुआयने के दौरान किसानों ने बारिश की स्थिति, फसलों को चाहिए पानी और खेती की तमाम दिक्कतें कृषिमंत्री के सामने रखीं।
कृषिमंत्री भरणे ने बताया कि प्रशासन के स्तर पर कोशिशें जारी हैं। उनके मुताबिक किसानों के खेत तक खुद जाकर हालात देखने से स्थानीय स्तर की परेशानियां प्रशासन तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस मुआयने के आधार पर संबंधित इलाके की रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर कामगार मंत्री आकाश फुंडकर, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक दिलीपकुमार सानंदा के साथ साथ कृषि विभाग और प्रशासन के अफसर भी मौजूद रहे।
दूसरी तरफ बुलढाणा जिले में बारिश की कमी से खरीफ फसलों को हुए नुकसान को लेकर कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कृषिमंत्री भरणे का काफिला रोककर उन्हें किसानों की मांगों का ज्ञापन सौंपा। उनकी मांग थी कि जिले की सूखे जैसी हालत का तुरंत जायजा लेकर किसानों को ठोस मदद दी जाए। कांग्रेस पदाधिकारियों ने कृषिमंत्री को बताया कि बारिश न होने से खरीफ सीजन की फसलों का भारी नुकसान हुआ है। उनका कहना था कि खामगाव, जळगाव, शेगाव, मलकापूर जैसे कई इलाकों में बारिश का बड़ा गैप पड़ा है और हाथ आया खरीफ सीजन खतरे में पड़ गया है। ज्ञापन में पूरे जिले का निष्पक्ष सर्वे कर सूखे जैसी स्थिति दर्ज करने, नुकसान झेल रहे किसानों को तुरंत आर्थिक मदद देने, फसलों के तुरंत पंचनामे कर मुआवजा देने और फसल बीमा, कर्ज व सरकारी योजनाओं से जरूरी मदद दिलाने की मांग रखी गई।
इसके अलावा सत्याग्रह किसान संगठन ने भी पारखेड फाटा पर कृषिमंत्री भरणे का काफिला रोककर पूरे बुलढाणा जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों को भरपूर मदद देने की मांग की। संगठन का दावा है कि जिले में कई जगह 45 दिन से ज्यादा समय तक बारिश नहीं हुई। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजू नाकाडे ने कृषिमंत्री के सामने किसानों की समस्याएं रखते हुए आरोप लगाया कि सूखा या गीला अकाल आने के बावजूद बुलढाणा जिले को अक्सर मदद से बाहर रखा जाता है। नाकाडे ने चेतावनी दी कि अब आगे से मामूली मदद मंजूर नहीं होगी और अगर किसानों को भरपूर सहायता नहीं मिली तो बड़ी संख्या में किसानों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष समाधान भातुरकर, प्रदीप देशमुख, गणेश गावंडे, मनोज पाटील, विष्णू टाले, रामेश्वर डोबे, संजय फाटे, पुंडलिक यादगिरे, गौरव हेलगे, अर्जुन खानंदे, महेश हेलगे, गजानन यादगिरे, पांडुरंग पुराने, अनिल गवांदे, गणेश राखुंडे, विठ्ठल शिंदे, नारायण यादगिरे, गणेश भेलके, नंदकिशोर लाहूळकर और पवन टापरे मौजूद रहे।
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