प्रयाग डेवलपर्स से जुड़े 2 ठिकानों पर ईडी का छापा, 1.95 करोड़ रुपये नकद जब्त
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जांच एजेंसी ने 40 लाख रुपये से अधिक के बैंक डिपॉजिट किए फ्रीज
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नागपुर ने रियल एस्टेट डेवलपर शशांक गोविंदप्रसाद पांडे से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 1.95 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जब्त की है और 40 लाख रुपये से अधिक के बैंक बैलेंस को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी उन आरोपों की जांच कर रही है जिनमें पांडे ने एक बुजुर्ग विधवा सहित कई लोगों के साथ संपत्ति सौदों में धोखाधड़ी की थी।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत नागपुर में दो स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। पांडे प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के प्रोप्राइटर (मालिक) हैं। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए। तलाशी में करोड़ों रुपये की कई अचल संपत्तियों की पहचान हुई है, जिनके अपराध की आय से खरीदे जाने का संदेह है।
यह जांच भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 418 और 420 के तहत अजनी और प्रताप नगर पुलिस थानों में दर्ज मामलों के आधार पर शुरू की गई थी।
ईडी के अनुसार, पांडे ने एक वरिष्ठ नागरिक विधवा के साथ विकास समझौता (डेवलपमेंट एग्रीमेंट) किया था। समझौते के तहत, उन्हें उस महिला को 1.75 करोड़ रुपये का भुगतान करना था और 14 आवासीय फ्लैट आवंटित करने थे।
ये फ्लैट एक 'डिक्लेरेशन-कम-करेक्शन डीड' के माध्यम से महिला के नाम पर तय किए गए थे। हालांकि, ईडी का आरोप है कि पांडे ने महिला की जानकारी या सहमति के बिना इस डीड को रद्द कर दिया और फ्लैट अन्य खरीदारों को बेच दिए। बिक्री से प्राप्त 8.93 करोड़ रुपये की राशि को कथित तौर पर अपने निजी उपयोग के लिए डाइवर्ट कर लिया। वह महिला को अन्य 45 लाख रुपये का भुगतान करने में भी विफल रहा। इस प्रकार महिला को कुल 9.4 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
जांच एजेंसी को 'दिव्य प्रयाग अपार्टमेंट' परियोजना में भी अनियमितताएं मिली हैं। 22 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लोन के बदले दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) के पास 22 फ्लैट गिरवी रखे गए थे, जिसमें से 11 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे।
ईडी का आरोप है कि पांडे ने ऋणदाता (फाइनेंस कंपनी) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त किए बिना और खरीदारों को गिरवी की जानकारी दिए बिना इन फ्लैटों को बेच दिया। उन्होंने होम लोन लेते समय बैंक में झूठा हलफनामा भी जमा किया था।
ऋणदाता ने बाद में 12.84 करोड़ रुपये का बकाया दर्ज कराया और सरफेसी (SARFAESI) अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की।
ईडी को संदेह है कि इन लेन-देन से फ्लैट खरीदारों को भारी नुकसान हुआ और पांडे को अवैध लाभ मिला। मामले में आगे की जांच जारी है।
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