नागपुर कांग्रेस में खींचतान? कोहले के प्रचार कार्यक्रम में सतीश चतुर्वेदी का नाम, उठे सवाल
नागपुर स्नातक चुनाव में भाजपा-महायुति उम्मीदवार कोहले की बैठक के ब्योरे में सतीश चतुर्वेदी का नाम आने से कांग्रेस में सवाल उठे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर शहर में सियासी चर्चा तेज हो गई है। वजह यह है कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी का नाम प्रोफेसरों की एक बैठक के ब्योरे में आया है। यह बैठक भाजपा-महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में रखी गई थी।
कांग्रेस ने इसी सीट से अभिजीत वंजारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में नागपुर कांग्रेस के अंदर के समीकरणों पर सवाल उठ रहे हैं। चतुर्वेदी को पार्टी से निकाला गया था और वे हाल ही में कांग्रेस में लौटे हैं, इसलिए प्रचार से जुड़े इस कार्यक्रम में उनके नाम की चर्चा और ज्यादा हो रही है। हालांकि कार्यक्रम में उनकी असल भूमिका क्या थी, यह अब तक साफ नहीं है। यह मामला कांग्रेस नेतृत्व को राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में डाल सकता है।
कोहले के प्रचार के लिए हिंगना रोड पर डिगडोह हिल्स के प्रियदर्शनी कैंपस में प्रोफेसरों की बैठक रखी गई थी। भाजपा से जुड़े पदाधिकारी डॉ. राजेश गाडेवार की ओर से भेजे गए एक संदेश में बताया गया कि इस जमावड़े से कई राजनीतिक और शैक्षणिक हस्तियां जुड़ी हैं, और उनमें चतुर्वेदी का नाम भी गिना गया।
आयोजकों के संदेश के मुताबिक बैठक में स्नातकों से जुड़े मुद्दों, शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों और शिक्षकों व प्रोफेसरों की उम्मीदों पर बात हुई। साथ ही कोहले के लिए समर्थन की अपील भी की गई।
चतुर्वेदी की कांग्रेस में हाल की वापसी को देखते हुए इवेंट के ब्योरे में उनका नाम आना उनकी सियासी स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है। लेकिन यह अलग से पक्का नहीं हो सका है कि उन्होंने कोहले के लिए सक्रिय प्रचार किया, खुलकर उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया, या सिर्फ बैठक में मौजूद थे।
जब कांग्रेस ने वंजारी को उतारा है, तो आम तौर पर पार्टी यही उम्मीद करती है कि उसके नेता और कार्यकर्ता आधिकारिक उम्मीदवार के साथ खड़े रहें। इसलिए विरोधी उम्मीदवार के समर्थन वाले कार्यक्रम से एक वरिष्ठ नेता का नाम जुड़ना चर्चा का मुद्दा बन गया है।
सवाल यह भी है कि क्या यह नागपुर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी का संकेत है, और क्या पार्टी के कुछ हिस्सों में उम्मीदवार या चुनावी रणनीति को लेकर नाराजगी है। स्थानीय इकाई के अंदरूनी समीकरणों को लेकर अटकलों के बीच ये सवाल उठे हैं। फिर भी मौजूद जानकारी से यह साबित नहीं होता कि कांग्रेस के नेता जानबूझकर वंजारी के खिलाफ काम कर रहे हैं या उन्हें हराने की कोशिश में हैं। पार्टी की अंदरूनी हालत पर कोई नतीजा निकालने से पहले चतुर्वेदी की असल भूमिका और वहां उनकी मौजूदगी के हालात साफ होने चाहिए।
अब नजर कांग्रेस नेतृत्व पर है कि वह चतुर्वेदी से सफाई मांगेगा या इस मामले को पार्टी अनुशासन के नजरिए से देखेगा। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए अहम मुकाबला है। अगर कभी यह पक्का हुआ कि पार्टी का कोई नेता विरोधी उम्मीदवार का साथ दे रहा था, तो संगठन के तालमेल और वंजारी के प्रचार के असर पर चिंता उठ सकती है।
अब बड़े सवाल ये हैं कि कार्यक्रम में चतुर्वेदी की भूमिका क्या थी, कांग्रेस नेतृत्व क्या जवाब देता है और क्या यह घटना नागपुर इकाई के भीतर गहरे मतभेद दिखाती है। इन्हीं जवाबों से तय होगा कि यह विवाद सिर्फ सियासी चर्चा तक रहेगा या संगठन का बड़ा मसला बनेगा।
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