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08:22 IST

नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा में नाराजगी, प्रचार की कमान फडणवीस के हाथ

विधान परिषद की नागपुर संभाग स्नातक सीट पर भाजपा के भीतर रोष की चर्चा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, नितिन गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले प्रचार में जुटे हैं।

नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा में नाराजगी, प्रचार की कमान फडणवीस के हाथ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

विधान परिषद की स्नातक चुनाव क्षेत्र की नागपुर संभाग सीट भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है। यह सीट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, तीनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बताई जा रही है। मुकाबले में भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले हैं और कांग्रेस की तरफ से अभिजीत वंजारी मैदान में हैं।

उम्मीदवार तय होने के बाद पार्टी में जो नाराजगी उठी थी, वह अभी थमी नहीं है। ऊपर से देखने पर भाजपा खेमे में सब ठीक लगता है, लेकिन कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता दबी जुबान में अपना रोष जता रहे हैं। यह रोष पार्टी पर भारी पड़ सकता है और बड़े नेताओं को भी इसकी भनक है। इसी वजह से खुद मुख्यमंत्री को कोहले की जीत पक्की करने के लिए पूरी कमान संभालनी पड़ रही है।

बागी उम्मीदवार अनिल सोले नामांकन वापसी की तारीख तक अपने बड़े नेताओं के लिए भी नॉट रिचेबल हो गए थे। उस दौरान गडकरी ने भी फोन पर संपर्क की कोशिश की, पर वह कामयाब नहीं हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामला अपने हाथ में लिया, सोले के घर जाकर बात की और चुनाव से हटने की घोषणा उन्हीं के मुंह से करवाई।

सोले ने मैदान से हटने की घोषणा तो कर दी, लेकिन उनका नाम बैलेट पेपर पर रहेगा, क्योंकि उन्होंने नामांकन वापसी की तय तारीख पर नाम वापस नहीं लिया था। सोले के कई समर्थक अब भी कह रहे हैं कि नतीजे आने के बाद सबकी समझ में आ जाएगा कि कौन किसके साथ है। भाजयुमो के एक पदाधिकारी और भाजपा के ज्येष्ठ प्रकोष्ठ के एक बहुत वरिष्ठ पदाधिकारी ने माना कि सोले अधिकृत उम्मीदवार के काफी वोट काटेंगे, जो ठीक नहीं होगा। नतीजा इस पर निर्भर करेगा कि पार्टी के नेता बचे हुए 4 दिनों में नाराजगी कैसे दूर करते हैं।

जातीय समीकरण की भी चर्चा है। नागपुर की स्नातक सीट पर जब से चुनाव शुरू हुए हैं, भाजपा से सिर्फ एक बार ओबीसी उम्मीदवार जीता है। 2020 से पहले तक इस सीट पर ब्राहमण उम्मीदवार ही काबिज रहे। सोले और उनके साथ बगावत करने वाले व्यास इसी समीकरण में फिट बैठ रहे थे। सोले एक बार चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन 2020 में उन्हें हटाकर संदीप जोशी को मौका दिया गया। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जोशी को हराया था और राजनीतिक महकमे में उस हार की वजह भाजपा की भीतरी फूट बताई गई थी।

इस बार फडणवीस ने कुणबी समाज के सुधाकर कोहले को उतारा है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार वंजारी तेली समाज से आते हैं। कहा जाता है कि स्नातक चुनाव के वोटरों को जाति या समाज से कोई मतलब नहीं होता, पर यह सही नहीं है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो अब इस सीट पर कुणबी बनाम तेली का मुकाबला होने वाला है। कुछ का दावा है कि तेली फैक्टर भारी पड़ सकता है, बशर्ते कांग्रेस की आपसी खींचतान इस चुनाव में असर न दिखाए।

भाजपा हर हाल में यह सीट वापस लेना चाहती है, इसलिए वरिष्ठ नेताओं ने सभाओं की झड़ी लगा दी है। गडकरी दिन में 4 से 6 छोटी प्रचार सभाएं ले रहे हैं। पालकमंत्री बावनकुले ग्रामीण इलाकों में लगातार दौरे कर रहे हैं। रविवार 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री फडणवीस की शहर में 7 प्रचार सभाएं हैं। वे पूरे संभाग का दौरा कर पार्टी उम्मीदवार की जीत के लिए बैठकें ले रहे हैं।

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