सुधाकर कोहळे बोले: पार्टी की परंपरा से मिली उम्मीदवारी, सोले-व्यास का आरोप गलत
भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहळे ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी पार्टी के नियमों और परंपरा के मुताबिक तय हुई और घोषणा दिल्ली से हुई।
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विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा में उम्मीदवार तय करते वक्त नियमों और परंपराओं का पालन नहीं हुआ, यह आरोप अनिल सोले (Anil Sole) और गिरीश व्यास (Girish Vyas) ने लगाया है। भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे ने इस आरोप को गलत बताया है। (Nagpur Graduate Constituency Election 2026)
कोहळे का दावा है कि उनकी उम्मीदवारी पार्टी के नियमों और परंपरा के मुताबिक ही तय हुई है और उम्मीदवारी का ऐलान दिल्ली से किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अनिल सोले उनके गुरु हैं और उन्हें आशीर्वाद देना चाहिए।
कोहळे ने बताया कि 2020 के चुनाव की हार की टीस दूर करने के लिए वे पिछले एक साल से काम में जुटे हैं। इसके लिए नागपुर विभाग के सभी 32 तहसीलों में घूमकर उन्होंने मतदाता पंजीकरण किया। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बूथ पर जाकर मतदाता पंजीकरण करने के निर्देश दिए थे। कोहळे ने कहा कि इस चुनाव के लिए पंजीकरण प्रमुख की जिम्मेदारी उन पर थी, इसलिए मतदाताओं तक पहुंचकर पंजीकरण करना जरूरी था और उन्होंने वह काम किया।
कोहळे ने भरोसा जताया कि इस चुनाव में पार्टी के भीतर बगावत के झंडे कहीं नजर नहीं आ रहे हैं, और अगर कोई गलतफहमी है तो वह दूर हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अनिल सोले पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उम्मीदवारी को लेकर खड़ा हुआ यह मामला वरिष्ठ नेताओं के स्तर का है और वही इसका हल निकालेंगे। सोले ने निरंकुशता का जो मुद्दा उठाया है, उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, यह भी कोहळे ने साफ किया। कोहळे के मुताबिक वे फिलहाल प्रचार पर ध्यान दे रहे हैं और पार्टी ने भी प्रचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि उनके हाथ में पार्टी का प्रचार पत्रक है और उसे लेकर वे मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं।
कोहळे ने कहा कि 2020 में हुई हार हम सबको बहुत चुभी थी। इस चुनाव में जीत मिले बिना उस हार की टीस दूर नहीं होगी, इसलिए पूरी ताकत से चुनाव जीतने के लिए सब काम में लगे हैं।
कोहळे ने बताया कि वे पिछले 35 साल से भाजपा में काम कर रहे हैं और अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की परंपरा है कि एक बार फैसला हो जाए तो कितने भी तूफान आएं, हर कार्यकर्ता को वह फैसला मानकर पार्टी के साथ खड़ा रहना चाहिए।
अनिल सोले को लेकर कोहळे ने कहा कि वे उनके गुरु हैं और उन्होंने उन्हें गणित और राजनीति सिखाई है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सोले अपने शिष्य को आशीर्वाद देंगे। उम्मीदवारी को लेकर चल रही चर्चा के बीच कोहळे ने सोले के प्रति सम्मान जताया और कहा कि पार्टी के फैसले के मुताबिक उनका ध्यान चुनाव जीतने पर है।
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