नागपुर स्नातक चुनाव: हजारों आवेदन बाकी रहते मतदाता सूची पर हाई कोर्ट में रिट याचिका
कालबांडे की याचिका में आरोप है कि लंबित आवेदनों के बावजूद अंतिम सूची और चुनाव की प्रक्रिया जल्दबाजी में आगे बढ़ाई जा रही है। 23 अक्टूबर को मतदान तय है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आने वाले चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कालबांडे की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप है कि बड़ी संख्या में स्नातक मतदाताओं के आवेदन अब तक लंबित हैं, फिर भी अंतिम मतदाता सूची जारी करने और चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में जल्दबाजी की जा रही है।
गुरुवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने याचिका को मुंबई हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया। इससे पहले न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास की अदालत ने 'नॉट बिफोर मी' कहते हुए याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
याचिका के मुताबिक नागपुर विभाग में मतदाता पंजीयन की आखिरी तारीख 26 सितंबर तय की गई थी। 22 सितंबर तक विभाग में कुल 1,94,404 आवेदन आ चुके थे। इनमें से 1,59,192 आवेदनों की जांच और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
लेकिन पंजीयन की आखिरी अवधि में आवेदनों की संख्या अचानक काफी बढ़ गई। बताया गया है कि आखिरी 4 दिनों में ही 98,782 से ज्यादा आवेदन आए। इनकी जांच और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इनमें अकेले नागपुर जिले के 61,371 आवेदन लंबित बताए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर आवेदन बाकी होने के बावजूद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऑनलाइन आवेदनों की जांच और प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रशासन की तरफ से सिर्फ 2 लॉगिन आईडी दी गई थीं। इस वजह से आवेदनों की जांच की रफ्तार काफी धीमी रही। आखिरी दिनों में बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद प्रशासन के सामने उन्हें समय पर निपटाना चुनौती बन गया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन भी बड़ी संख्या में लंबित रह गए।
जानकारी सामने आई है कि नागपुर विभागीय आयुक्त कार्यालय की ओर से अंतिम मतदाता सूची अभी तैयार नहीं हुई है, जबकि मतदान 23 अक्टूबर को तय है। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि अंतिम सूची बनाने, लंबित आवेदनों की जांच करने और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने के लिए पर्याप्त समय है या नहीं।
याचिकाकर्ता ने पूछा है कि जब हजारों आवेदन अभी लंबित हैं और अंतिम मतदाता सूची भी तैयार नहीं है, तो चुनाव की प्रक्रिया को इतनी जल्दी में आगे बढ़ाने की जरूरत क्या है। याचिकाकर्ता के मुताबिक अगर लंबित आवेदनों का निपटारा किए बिना चुनाव कराया गया, तो इसका सीधा असर उन स्नातकों के मतदान के अधिकार पर पड़ेगा जिन्होंने तय समय में अपना आवेदन दिया था।
इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची की खास अहमियत है, क्योंकि यहां सिर्फ तय पात्रता पूरी करने वाले स्नातक ही वोट डाल सकते हैं। इसलिए हर पात्र आवेदक के आवेदन की जांच कर उसे सूची में शामिल करना चुनाव की विश्वसनीयता के लिए जरूरी माना जाता है। याचिका में कहा गया है कि अगर बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रहते हुए अंतिम सूची तैयार कर दी गई, तो इससे हजारों स्नातकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ेगा और चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।