गिरीश व्यास ने भाजपा के सभी पद छोड़े, स्नातक चुनाव में अनिल सोले के साथ
नामांकन वापसी के आखिरी दिन पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दिया।
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नागपुर में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह कदम पूर्व विधायक अनिल सोले के समर्थन में उठाया है।
व्यास ने अपने इस्तीफे का ऐलान उस दिन किया जो नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन था। इससे उम्मीदवार के चयन को लेकर पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष की तरफ ध्यान गया है।
भाजपा ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सुधाकर कोहले को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। लेकिन अनिल सोले ने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे पार्टी के अंदर का तनाव और बढ़ गया है। सोले के समर्थन में व्यास के इस्तीफे से नागपुर में भाजपा के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं।
बताया जा रहा है कि कोहले को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के कुछ हिस्सों में नाराजगी है। पार्टी नेतृत्व कोहले के साथ खड़ा है, जबकि सोले का निर्दलीय मैदान में उतरना पार्टी की चुनावी रणनीति के लिए चुनौती बनकर सामने आया है।
व्यास के इस्तीफे ने पार्टी के आंतरिक मतभेदों को और उजागर कर दिया है। सोले के पक्ष में उनके कदम से चुनाव से पहले नागपुर भाजपा के भीतर गुटबाजी को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
नामांकन वापसी के आखिरी दिन पार्टी छोड़ने से इस मुकाबले में एक अहम राजनीतिक मोड़ आ गया है। इन घटनाक्रमों के बाद भाजपा के उम्मीदवार चयन के असर और बढ़ते असंतोष के संभावित नतीजों पर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक जानकार इस पर नजर रखे हुए हैं कि सोले की निर्दलीय उम्मीदवारी का असर कोहले की जीत की संभावनाओं पर पड़ता है या नहीं, और व्यास के इस्तीफे से पार्टी के समर्थक आधार पर क्या फर्क आता है।
कुल मिलाकर, कोहले भाजपा की ओर से मैदान में हैं, सोले पार्टी को निर्दलीय चुनौती दे रहे हैं और व्यास ने उनके समर्थन में इस्तीफा दिया है। इस तरह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव नागपुर में भाजपा की आंतरिक एकता की परीक्षा बन गया है।
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