नागपुर स्नातक सीट पर प्रचार थमा, शुक्रवार को वोटिंग; वंजारी और कोहले में सीधी टक्कर
विधान परिषद की नागपुर विभाग स्नातक सीट पर बुधवार शाम प्रचार खत्म हो गया। शुक्रवार को मतदान होगा और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी व भाजपा के सुधाकर कोहले के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।
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विधान परिषद के नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बुधवार शाम चुनावी शोर थम गया। अब शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे। यह निर्वाचन क्षेत्र छह जिलों में फैला हुआ है और यहां कांग्रेस के अभिजीत वंजारी तथा भाजपा के सुधाकर कोहले के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।
प्रचार के आखिरी दौर में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी, दोनों के 'पोल मैनेजर्स' सक्रिय रहे। अब दोनों दलों की रणनीति इस पर टिकी है कि मतदाताओं से संपर्क बना रहे और उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाया जाए।
पिछले चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की थी। इस जीत के साथ जनसंघ और भाजपा का लगभग 58 साल पुराना वर्चस्व खत्म हुआ था। इस बार भाजपा यह सीट वापस पाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस को अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद है। इसी वजह से मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।
निर्वाचन क्षेत्र में कुल 38 उम्मीदवार होने की जानकारी है। इनमें शिक्षक भारती के अतुल देशमुख भी हैं। संजय थुल बसपा से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय लड़ रहे हैं। इन उम्मीदवारों के प्रदर्शन से चुनावी समीकरण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा ने प्रभारी, सह-प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं की टीम तैनात की है। पार्टी के पोल मैनेजर वोटिंग से पहले मतदाताओं से संपर्क करने और उन्हें बूथ तक लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा का मुख्य फोकस नागपुर शहर और दूसरे शहरी इलाकों पर है।
चुनाव के आखिरी हफ्ते में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बैठकें कीं, अलग-अलग वर्गों से बातचीत की और जनसभाओं को संबोधित किया। महायुति के समन्वयक सुधीर मुनगंटीवार, चुनाव प्रभारी एवं पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और चुनाव प्रमुख विधायक प्रवीण दटके भी अपनी टीमों के साथ सक्रिय रहे।
कांग्रेस के नेता भी आखिरी दौर में तालमेल के साथ काम करते दिखे। पार्टी ने बड़े प्रचार कार्यक्रमों के बजाय मतदाताओं से सीधे संपर्क पर ज्यादा जोर दिया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने इलाकों में जनसंपर्क किया। बताया जा रहा है कि पार्टी का ध्यान मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर है, और कांग्रेस को उम्मीद है कि पिछले चुनाव में मिला समर्थन इस बार भी उसके साथ रहेगा।
प्रचार खत्म होने के बाद दोनों प्रमुख दलों का ध्यान मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर है। छह जिलों में फैले इस क्षेत्र में वोटिंग का प्रतिशत और अलग-अलग उम्मीदवारों को मिलने वाला समर्थन नतीजे पर असर डाल सकता है। मुकाबले का फैसला शुक्रवार के मतदान और उसके बाद होने वाली मतगणना से साफ होगा।
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