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16:40 IST

नागपुर ग्रैजुएट सीट: भाजपा ने सुधाकर कोहळे को उतारा, अनिल सोले निर्दलीय लड़ेंगे

नागपुर ग्रैजुएट सीट: भाजपा ने सुधाकर कोहळे को उतारा, अनिल सोले निर्दलीय लड़ेंगे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर संभाग ग्रैजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। पार्टी ने पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता सुधाकर कोहळे को मैदान में उतारा है। लेकिन इस फैसले के साथ एक नया मोड़ भी आया है। भाजपा का टिकट न मिलने पर पूर्व एमएलसी अनिल सोले ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

रविवार को रामगिरी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा की उम्मीदवारी कोहळे को औपचारिक रूप से सौंपी। इस मौके पर एमएलसी डॉ. परिणय फुके और डॉ. राजीव पोतदार, महापौर नीता ठाकरे, पूर्व एमएलसी सागर मेघे, विधायक समीर मेघे, पूर्व विधायक विकास कुंभारे और मनपा में सत्तारूढ़ दल के नेता बल्या बोरकर समेत कई लोग मौजूद थे।

सोमवार को कोहळे ने संभागीय आयुक्त के दफ्तर में नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही भाजपा का बहुप्रतीक्षित फैसला आधिकारिक चुनावी मुकाबले में बदल गया। नामांकन के वक्त राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार, राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर और एडवोकेट आशीष जायसवाल, एमएलसी कृपाल तुमाने, पूर्व सांसद अजय संचेती और राज्यसभा सदस्य माया इवनाते भी मौजूद रहे।

कांग्रेस के उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी एडवोकेट अभिजीत वंजारी ने भी सोमवार को ही नामांकन भरा। वंजारी दूसरे कार्यकाल के लिए मैदान में हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार संदीप जोशी को हराया था।

सोले के निर्दलीय उतरने से मुकाबले का गणित काफी बदल गया है। उनके राजनीतिक अनुभव और ग्रैजुएट मतदाताओं के बीच बने समर्थन आधार को देखते हुए माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी से भाजपा और कांग्रेस के बीच का मुकाबला कई कोनों वाला और कड़ा हो सकता है।

मैदान में लोक जागृति मोर्चा के एडवोकेट रमन सेनाड भी हैं, जो निर्दलीय लड़ रहे हैं और सोमवार को नामांकन दाखिल करने वाले थे। सेनाड खुद को बेहद उच्च शिक्षित उम्मीदवार बताते हैं। उनका दावा है कि वे कई सालों से क्षेत्र के सभी छह जिलों के मतदाताओं के संपर्क में रहे हैं और उन्होंने जमीनी स्तर पर नेटवर्क खड़ा किया है।

कोहळे के नाम पर फैसला कई दिनों की अटकलों के बाद हुआ। बताया गया है कि कोहळे, सोले और कुछ और नामों पर विचार चल रहा था, जबकि सेनाड ने भी भाजपा की उम्मीदवारी में दिलचस्पी दिखाई थी। उम्मीदवार तय होने में देरी की चर्चा इसलिए भी रही कि कांग्रेस ने वंजारी के नाम का ऐलान काफी पहले कर दिया था और वे प्रचार की तैयारी शुरू कर चुके थे।

इसलिए सोले की बगावत पर भाजपा के भीतर नजर रहेगी। पार्टी का टिकट न मिलने के बाद भी उनके मैदान में डटे रहने से वोट बंट सकते हैं और भाजपा को पूरे क्षेत्र में अपनी प्रचार रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ सकती है।

चुनाव का कार्यक्रम भी तय है। महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के द्विवार्षिक चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी हुई थी। नामांकन 6 अक्टूबर तक भरे जा सकते हैं, 7 अक्टूबर को जांच होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है।

नागपुर संभाग ग्रैजुएट्स क्षेत्र के साथ औरंगाबाद और पुणे ग्रैजुएट्स तथा अमरावती और पुणे टीचर्स क्षेत्रों में भी 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी।

नागपुर संभाग ग्रैजुएट्स क्षेत्र में नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली, ये छह जिले आते हैं। अंतिम मतदाता सूची में 2.4 लाख से ज्यादा मतदाता होने की उम्मीद है।

कोहळे भाजपा के झंडे तले, वंजारी कांग्रेस की सीट बचाने और सोले निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं। इस तरह विदर्भ के छह जिलों वाले इस ग्रैजुएट्स क्षेत्र का चुनाव पार्टी मशीनरी, निजी समीकरणों और मतदाताओं को जुटाने की परीक्षा बनता दिख रहा है।

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