सत्ता की छतरी, सवालों की बारिश!
पांच करोड़ का खेल-एमपीएससी तक मेल, सत्ता के गलियारे में भी दबदबा, ठेकेदार मुन्ना वर्मा खुदकुशी प्रकरण
नागपुर.
पीडब्ल्यूडी ठेकेदार मुन्ना वर्मा आत्महत्या प्रकरण ने एक सत्ताधारी विधायक को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आरोप है कि अपने नजदीकी को कानूनी शिकंजे से बचाने की कोशिश में विधायक ने मुंबई के नेताओं को गुमराह करने की रणनीति के तहत पुसद अर्बन बैंक के अध्यक्ष शरद मैंद समेत अन्य आरोपियों को बचाने के नाम पर कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये की वसूली कर ली.
शराबबंदी वाले पड़ोसी जिले से जुड़े इस विधायक का नाम इससे पहले महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर भी चर्चा में आया था. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है.
एमपीएससी में भी गहरी पैठ होने की चर्चा
इस विधायक की चर्चा केवल मुन्ना वर्मा मामले में आरोपी से कथित वसूली तक सीमित नहीं है. सूत्रों का दावा है कि उसकी एमपीएससी में भी गहरी पैठ रही है. औषधि निरीक्षक भर्ती के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद आयोग और जिम्मेदार अधिकारियों को लेकर सवाल उठे थे. एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भिमनवार ने स्पष्ट किया था कि प्रश्नपत्र लीक की घटना जनवरी 2026 की है, जबकि उन्होंने 18 फरवरी, 2026 को अध्यक्ष का पदभार संभाला था. भिमनवार की इस सफाई के बीच आयोग के एक सदस्य की नियुक्ति और उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं.
तैनाती और 'फाइनेंस मैनेजमेंट'
सूत्रों के मुताबिक एमपीएससी के एक सदस्य का सरकारी सेवा में रहते हुए विवादित अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करने में प्रभाव रहा था। आरोप है कि मनपसंद जगह पर पोस्टिंग पाने के इच्छुक अधिकारी-कर्मचारी बिचौलियों के बजाय सीधे उन तक पहुंचते थे. रेत तस्करी के लिए चर्चित क्षेत्रों में तैनाती को लेकर भी बड़े लेन-देन की चर्चाएं होती थीं. इस सदस्य का जलवा यह था कि उनकी बात नहीं सुनी तो रेत तस्कर पर 'अलग' दबाव डाला जाता था. अपनी पसंद के अधिकारी की तैनाती को लेकर चंद्रपुर के एक वरिष्ठ अधिकारी से उनका विवाद भी होने की चर्चा है. इसकी जानकारी मुंबई के वरिष्ठ अधिकारियों तक गई थी.
सूत्रों के अनुसार, सरकारी सेवा में रहते हुए इस सदस्य को एक मामले में निलंबित भी किया गया था. इसके बावजूद एमपीएससी में उनका चयन होने से आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और चयन के मानकों पर सवाल उठने लगे.
जांच समिति के सामने बड़ी चुनौती
एमपीएससी प्रश्नपत्र लीक प्रकरण की जांच के लिए राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है. समिति की अध्यक्षता मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले कर रहे हैं, जबकि एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे को सचिव बनाया गया है. इधर, एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भिमनवार 12 अक्टूबर से अवकाश पर चले गए हैं. अब सवाल यह है कि प्रश्नपत्र लीक प्रकरण की जांच में आयोग की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों और कथित राजनीतिक प्रभाव को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या तस्वीर सामने आती है. साथ ही, पांच करोड़ रुपये की कथित वसूली और मुन्ना वर्मा प्रकरण से जुड़े आरोपों की सच्चाई भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
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