नागपुर पदवीधर चुनाव: चंद्रपुर में वंजारी की सभा, वडेट्टीवार और धानोरकर ने सत्ताधारियों को घेरा
चंद्रपुर के जिजाऊ सभागार में महाविकास आघाड़ी की प्रचार सभा हुई, जिसमें विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धानोरकर ने सत्ताधारियों पर आरोप लगाए।
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नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार एड. अभिजित वंजारी के प्रचार के लिए चंद्रपुर के जिजाऊ सभागार में सभा रखी गई। मतदान 23 अक्टूबर को है।
सभा में विधानमंडल दल के नेता, विधायक विजय वडेट्टीवार ने सत्ताधारियों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। वडेट्टीवार के मुताबिक यह सत्ता की मनमानी के खिलाफ जनता के मन में जमा गुस्से को सामने रखने की लड़ाई है। वहीं चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद प्रतिभा धानोरकर ने आरोप लगाया कि सत्ताधारियों की तरफ से मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
मंच पर चंद्रपुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद प्रतिभा धानोरकर, शिक्षक विधायक सुधाकर अडबाले, चंद्रपुर शहर जिलाध्यक्ष शिवा राव और कांग्रेस नेता आरिफ बेग, विनायक बांगडे, सुभाष गौर, अनिल शिंदे, विनोद दत्तात्रय, अरुण धोटे, राजेश अडूर, सचिन कत्याल, चंदा वैरागडे और कुंदा जेणेकर मौजूद थे।
बोलते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि किसानों के सवाल, पदवीधर मतदाताओं के सवाल, लोकतंत्र के मूल्यों की हिफाजत, सत्ताधारियों की नीतियों की आलोचना और आने वाले चुनाव की अहमियत जैसे मुद्दों पर नेताओं ने अपनी बात रखी। सभा के जरिए पदवीधर मतदाताओं तक महाविकास आघाड़ी की भूमिका पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे अहम है।
वडेट्टीवार ने आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए होना चाहिए, लेकिन सत्ता के दम पर विरोधियों की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि अभिजित वंजारी पदवीधर, बेरोजगारों और आम लोगों के सवाल उठाने वाले सर्वश्रेष्ठ पाँच विधायकों में से एक हैं। सदन में उनकी तत्परता भाषण के लायक है, यानी भाषण के लायक है। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि सत्ताधारी राम का नाम लेकर रावण को भी शर्मिंदा करने वाले हैं।
"यह तानाशाही सत्ताधारियों के खिलाफ आक्रोश की लड़ाई है," यानी यह तानाशाही सत्ताधारियों के खिलाफ आक्रोश की लड़ाई है, ऐसा कहकर वडेट्टीवार ने पदवीधर चुनाव को बड़ा राजनीतिक संदर्भ दिया। उनकी भूमिका यह रही कि जनता के सवालों पर आवाज उठाना, सरकार की नीतियों पर जवाब मांगना और लोकतंत्र में विरोधी विचारों की अहमियत बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पदवीधर मतदाता पढ़ा-लिखा, जागरूक और सामाजिक सवालों की समझ रखने वाला तबका है। इसलिए उनके मुताबिक इस चुनाव में शिक्षा, रोजगार, महंगाई और आम लोगों के सवालों पर चर्चा होनी चाहिए।
प्रतिभा धानोरकर ने अपने भाषण में सत्ताधारियों की चुनाव को लेकर भूमिका की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारियों की तरफ से मतदाताओं को अलग-अलग प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उनका कहना था कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं और मतदाताओं को किसी प्रलोभन में आए बिना उम्मीदवार की भूमिका, कामकाज और जनता के सवालों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता देखनी चाहिए।
धानोरकर ने कहा कि मतदाताओं का भरोसा लोकतंत्र की बुनियाद है, इसलिए चुनाव में मतदाताओं के सवालों और उम्मीदों को अहमियत मिलनी चाहिए। सभा में आघाड़ी के नेताओं ने अपनी-अपनी भूमिका रखी। प्रचार में पदवीधरों के सवाल असरदार ढंग से उठाने, शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों की तरफ ध्यान दिलाने और लोकतंत्र के मूल्यों की हिफाजत के मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है।
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