नागपुर स्नातक चुनाव में बावनकुले, दटके, वडेट्टीवार और पटोले वोटर नहीं, योग्यता है वजह
नागपुर संभाग के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता शैक्षणिक योग्यता न होने से मतदाता नहीं बन सकते।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव नजदीक आ रहा है और मतदाता पंजीयन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ओर से पंजीयन को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। मगर इन्हीं दोनों दलों के कई प्रमुख नेता खुद इस चुनाव में मतदाता नहीं हैं।
वजह यह है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता बनने के लिए जो शैक्षणिक योग्यता तय है, वह इन नेताओं के पास नहीं है। इस सूची में भाजपा के चुनाव प्रभारी और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और चुनाव प्रमुख प्रवीण दटके शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले भी इसी सूची में हैं।
ये नेता अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए चुनावी रणनीति और प्रचार की जिम्मेदारी तो संभालेंगे, लेकिन उन्हें खुद वोट डालने का अधिकार नहीं होगा। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के तौर पर नाम दर्ज कराने के लिए कम से कम स्नातक होना जरूरी है।
किसी भी विषय का स्नातक मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकता है। लेकिन नागपुर विभाग के 14 विधायक और 2 सांसद ऐसे हैं, जो तय शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते। इन 14 विधायकों में भाजपा के 10 विधायक हैं। इनके अलावा भाजपा और कांग्रेस के एक-एक सांसद भी इसी सूची में आते हैं।
आम चुनावों में उम्मीदवार बनने या वोट डालने के लिए कोई अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता नहीं होती। कोई भी पात्र नागरिक चुनाव लड़ सकता है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था इससे अलग है, क्योंकि यहां मतदाता बनने के लिए स्नातक होना ही पड़ता है। इस निर्वाचन क्षेत्र का मकसद स्नातकों और शिक्षित वर्ग से जुड़े मुद्दों को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व दिलाना है।
नेताओं की शैक्षणिक योग्यता इस तरह है। कृष्णा खोपड़े (भाजपा) 7वीं, चरण सिंह ठाकुर (भाजपा) 12वीं, मोहन मते (भाजपा) आईटीआई। प्रवीण दटके (भाजपा) डिप्लोमा प्रथम वर्ष, चंद्रशेखर बावनकुले (भाजपा) बीएससी प्रथम वर्ष, विजय वडेट्टीवार (कांग्रेस) 10वीं। किशोर जोरगेवार (भाजपा) 10वीं, राजू कारेमोरे (राष्ट्रवादी) 12वीं, नाना पटोले (कांग्रेस) बीए द्वितीय वर्ष।
विनोद अग्रवाल (भाजपा) 12वीं, संजय पुराम (भाजपा) 12वीं, धर्मराव बाबा आत्राम (राष्ट्रवादी) 10वीं, समीर कुणावार (भाजपा) 12वीं और राजेश बकाने (भाजपा) बीए प्रथम वर्ष हैं। राज्यसभा सांसद माया इवनाते 5वीं तक पढ़ी हैं, जबकि लोकसभा सांसद श्यामकुमार बर्वे बीए द्वितीय वर्ष तक पढ़े हैं।
उधर इसी चुनाव में भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रो. अनिल सोले को नामांकन वापस लेने के लिए मनाने की पार्टी की कोशिशें अब तक कामयाब नहीं हुई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी उनसे संपर्क करने की कोशिश की, पर संपर्क नहीं हो सका। नामांकन वापसी का गुरुवार आखिरी दिन है, इसलिए भाजपा की चिंता बढ़ गई है।
अनिल सोले भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले के खिलाफ बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। चर्चा है कि उनके लड़ने से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से पार्टी लगातार सोले को मनाने की कोशिश कर रही है।