नागपुर MLC चुनाव: अनिल सोले नाम वापस नहीं लेंगे, रविन्द्र चव्हाण को लौटना पड़ा
नागपुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा के बागी अनिल सोले ने नामांकन वापस लेने से इनकार किया। प्रदेशाध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण से मुलाकात नहीं हुई।
नागपुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा महायुति और महाविकास आघाडी, दोनों में बगावत हो गई है। इससे दोनों के अधिकृत उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बागी उम्मीदवारों को मनाने की कोशिशें नेताओं की तरफ से शुरू हैं, लेकिन सोमवार रात तक किसी को कामयाबी नहीं मिली।
भाजपा के बागी अनिल सोले ने नाम वापस लेने से साफ मना कर दिया। प्रदेशाध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण शाम को उनसे मिलने उनके पास गए थे। काफी देर इंतजार करने के बाद भी सोले वापस नहीं लौटे, इसलिए मुलाकात नहीं हो पाई और चव्हाण को खाली हाथ लौटना पड़ा।
मीडिया के सवालों पर सोले ने कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे और यह बात उन्होंने पार्टी नेताओं को पहले ही बता दी थी। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह अनुशासन नहीं तोड़ा है और सारे फैसले अनुशासन में रहकर ही लिए हैं। सोले ने कहा कि नामांकन दाखिल करने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से चर्चा की थी। इसलिए नामांकन वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता।
नामांकन के वक्त परिसर में भाजपा नेता आमना-सामना टालने की कोशिश करते दिखे। सोले के पहुंचने से कुछ देर पहले ही भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। सोले से सामना न हो, इसलिए भाजपा के नेता फौरन वहां से निकल गए। सोले के समर्थक उनके पक्ष में नारे लगाते रहे। सोले ने कहा कि स्नातकों का विश्वास और समर्थन ही उनकी असली ताकत है और वे उनके मुद्दों के लिए लगातार काम करते रहेंगे।
सोले के साथ सुनील अग्रवाल, प्रकाश लोनारे, विलास त्रिवेदी, बालासाहब कुलकर्णी, एड। लांजेवार, डॉ। सत्यवान मेश्राम, प्रतीक घोडे और डॉ. श्याम पुंडे मौजूद थे। रिपब्लिकन पार्टी और भाजयुमो के कुछ कार्यकर्ता भी साथ थे।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि अनिल सोले हमारे नेता हैं और उम्मीदवारी न मिलने से उन्हें थोड़ी निराशा हुई है। बावनकुले के मुताबिक वे खुद सोले से बात करेंगे और चुनाव में सहयोग करने का अनुरोध करेंगे।
सोले के बाद लोकजागृति मोर्चा की ओर से एड. रमन सेनाड नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे। उन्होंने भाजपा से उम्मीदवारी मांगी थी। पार्टी ने मौका नहीं दिया तो उन्होंने बगावत का झंडा उठा लिया। सेनाड ने कहा कि वे शुरू से ही संघ और भाजपा के स्वयंसेवक और कार्यकर्ता रहे हैं। उनके मुताबिक यह चुनाव पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं हो रहा है, इसलिए पार्टी को इस पर विचार करना चाहिए था।
महाविकास आघाडी में भी यही हाल है। वर्धा जिले के राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) गुट के बागी नितेश कराले महात्मा ज्योतिबा फुले की वेशभूषा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह स्नातकों का चुनाव है और वे मैदान में डटे रहेंगे। वे मविआ उम्मीदवार वंजारी के लिए मुसीबत बन गए हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता अनिल देशमुख ने कहा कि नामांकन वापस लेने के लिए नितेश कराले से बात की जाएगी। उनके मुताबिक महाआघाड़ी और मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए उचित रास्ता निकाला जाएगा।
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