सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 08:34 IST
PT24 खास खबर सबसे पहले PT24 पर, 22 अक्ट | 18:58

पांच करोड़ डकार गया सत्ताधारी विधायक !

ठेकेदार मुन्ना वर्मा की मौत की जांच पर लगा था सियासी ब्रेक, मुंबई में नेताओं को गुमराह कर पुलिस पर बनाया था दबाव, असली सूत्रधार अब भी गिरफ्त से बाहर

पांच करोड़ डकार गया सत्ताधारी विधायक !

नागपुर.

एक ठेकेदार की मौत, करोड़ों रुपये के बकाया बिल, कर्ज का जाल, बंधक बनाकर पिटाई के आरोप और सत्ता के गलियारों में कथित पांच करोड़ की डीलिंग! पीडब्ल्यूडी ठेकेदार पेनमाचा वेंकटेश्वर उर्फ मुन्ना वर्मा की मौत का मामला अब सिर्फ आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गया है। इस प्रकरण में एक सत्ताधारी विधायक पर गंभीर आरोप लगे हैं। दावा है कि विधायक ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर जांच की दिशा प्रभावित की, मुंबई में बैठे पार्टी नेताओं को गुमराह किया था और अपने परिजन समेत प्रभावशाली लोगों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए पुलिस पर दबाव बनवाया था. जिसकी वजह से मुन्ना वर्मा के खुदकुशी की सच्चाई सामने नहीं आई.

सूत्रों के अनुसार जांच को ठंडा करने के नाम पर पांच करोड़ रुपये की कथित सौदेबाजी हुई। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक ठेकेदार की मौत का मामला नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में जांच को प्रभावित करने की गंभीर कोशिश का मामला बन सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के लेन-देन और कथित मारपीट के तार सामने आने के बाद भी जांच उन लोगों तक क्यों नहीं पहुंच सकी, जिनकी भूमिका संदेह के घेरे में बताई जा रही है.

30-40 करोड़ के बिल अटके, कर्ज के बोझ तले दबे मुन्ना वर्मा

सदर के राजनगर में रहने वाले 61 वर्षीय मुन्ना वर्मा 1 सितंबर 2025 की सुबह अपने फ्लैट में मृत मिले थे. पीडब्ल्यूडी में उनके करीब 30 से 40 करोड़ रुपये के बिल बकाया होने की बात सामने आई थी. शुरुआती तौर पर आर्थिक तंगी को उनकी आत्महत्या की वजह माना गया था. वर्मा के परिजन हैदराबाद में रहते थे. एक ठेकेदार की मौत और सरकारी बिलों के भुगतान का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्र सिंगल ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी.

शुरुआती जांच में ही यवतमाल की पुसद अर्बन बैंक के अध्यक्ष शरद मैंद की भूमिका सामने आई थी. आरोप था कि नियमों को ताक पर रखकर वर्मा को करोड़ों रुपये के कर्ज दिए गए. पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए नए कर्ज दिए जाते रहे और देखते ही देखते कर्ज का बोझ बढ़ता गया था. क्राइम ब्रांच ने मैंद के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. अग्रिम जमानत हासिल करने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का एक अन्य मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया. इसके बाद मंजीत वाडे और सरकारी ठेकेदार राधेश्याम बियानी को भी आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

जांच में खुलने लगे राज, तभी सियासी रसूख की एंट्री?

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के हाथ कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े अहम सुराग लगे थे. इसी दौरान पुसद अर्बन बैंक से जुड़े एक विधायक के परिजनों और पूर्व मंत्री के निजी सहायक (पीए) की भूमिका सामने आने का दावा किया गया. सूत्रों के अनुसार, विधायक के परिजन पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों में मैंद की मदद करने का आरोप था. वहीं, पूर्व मंत्री के पीए पर मुन्ना वर्मा को उनकी मौत से दो दिन पहले बंधक बनाकर बेरहमी से पीटने का आरोप लगाया गया था. इन पहलुओं की जांच आगे बढ़ने पर मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था. दावा है कि अपने परिजनों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख विधायक सक्रिय हुआ था. उसने जांच प्रभावित करने के नाम पर कथित सौदेबाजी की और पांच करोड़ रुपये की डीलिंग की थी.

मुंबई में नेताओं को गुमराह करने का आरोप

आरोप है कि विधायक ने मुंबई में बैठे अपने राजनीतिक आकाओं के सामने मामले की तस्वीर ही बदलकर रख दी थी. पार्टी से जुड़े लोगों को पुलिस द्वारा बेवजह परेशान किए जाने की बात कहकर नेताओं को गुमराह किया गया। इसके बाद वरिष्ठ स्तर से आए कथित दबाव ने जांच की दिशा बदल दी थी. इस तरह यदि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण जांच सीमित हुई, तो यह बेहद गंभीर मामला है। कानून की नजर में हर आरोपी बराबर है, फिर किसी प्रभावशाली व्यक्ति को कथित राजनीतिक पहुंच के दम पर राहत कैसे मिल सकती है? क्या जांच का दायरा आरोपों में सामने आए सभी लोगों तक पहुंचा, या फिर रसूखदारों के नाम आते ही कार्रवाई की रफ्तार बदल गई?

पूर्व मंत्री के पीए पर आरोप, पूछताछ की नौबत आते ही हलचल

मुन्ना वर्मा को बंधक बनाकर पीटने के आरोपों के बाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व मंत्री के पीए को पूछताछ के लिए बुलाया। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ की खबर से वह घबरा गया और खुद को नुकसान पहुंचाने की आशंका से जुड़ी अफवाह फैलाकर वर्धा मार्ग स्थित एक फाइव स्टार होटल में छिप गया. उसके अचानक गायब होने से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। बाद में वह होटल से वापस लौट आया था.

पांच करोड़ की कथित डीलिंग, बदनामी पुलिस के हिस्से!

मुन्ना वर्मा की मौत के मामले में क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है. गिरफ्तार आरोपी जमानत पर बाहर आ गए है लेकिन मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका को लेकर सवाल अब भी कायम हैं. एक ओर जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल करने की कार्रवाई हुई, तो दूसरी ओर कथित राजनीतिक दबाव, पांच करोड़ रुपये की डीलिंग और जांच का दायरा सीमित किए जाने के आरोप सामने आए. यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस की निष्पक्षता और कानून के समान अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुन्ना वर्मा की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आई या जांच कुछ आरोपियों तक सीमित रह गई.

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे