सतीश चतुर्वेदी पर कार्रवाई की तैयारी!
अपनों से बैर, विपक्ष से यारी!
नागपुर.
नागपुर कांग्रेस की गुटबाजी थमने का नाम ही नहीं ले रही. इसका ताजा उदाहरण पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता सतीश चतुर्वेदी की और से भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में ली गई बैठक के रूप में देखा जा सकता है. सतीश चतुर्वेदी ने विधान परिषद की सीट के लिए हो रहे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में अपनी शैक्षणिक संस्थाओं की ताकत कांग्रेस के पक्ष में खड़े करने की बजाय विपक्ष के पीछे खड़ी कर दी. शहर कांग्रेस में ढ़ाई दशक से ही गुटबाजी चली आ रही है. लेकिन आला कमान इस बात को गंभीरता से नहीं लेता. शहर कांग्रेस के अध्यक्ष प्रफुल गुड़धे और विकास ठाकरे की आपस में कभी बनी नहीं. सतीश चतुर्वेदी और विकास ठाकरे की अनबन जगजाहिर है. इसके बाद भी इन लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाती. नेताओं के चक्कर में कार्यकर्ताओं की एक पीढ़ी बर्बाद हो गई है. विधानसभा चुनाव के दौरान चतुर्वेदी ने पूर्व नागपुर में सालों से सतरंजी उठा रहे पार्टी कार्यकर्ताओं पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया था. ऐसे लोगों की पार्टी से शिकायत भी की थी. पार्टी के बड़े नेता होने से चतुर्वेदी की बात को तवज्यों भी दी गई थी. उन कार्यकर्ताओं को मनपा चुनाव में टिकट से वंचित रखा गया था. लेकिन अब चतुर्वेदी स्वयं पार्टी उम्मीदवार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हैं. ऐसे में क्या काँग्रेस के नेता उनके ख़िलाफ़ कारवाई कर पाएंगे? यही सवाल आम कार्यकर्ता की ज़ुबान पर आज मतदान के दौरान सुनने को मिल रहा था. याद रहे की उनका बेटा महायुती की सहयोगी पार्टी शिवसेना शिंदे गुट से विधान परिषद सदस्य है. इस वजह से कांग्रेस पार्टी की निष्ठावानों की पार्टी हाईकमान के फैसले पर नजरी टिकी हुई है. 'प्राइमटाइम24' को पार्टी हाईकमान द्वारा चतुर्वेदी की भूमिका को गंभीरता से लिए जाने का पता चला है. शुक्रवार को मतदान के दौरान भी चतुर्वेदी कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच चर्चा में बने हुए थे.
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