नागपुर भाजपा में बगावत थमी, अनिल सोले ने नाम वापस लिया, कोहले और वंजारी में सीधी टक्कर
नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा की अंदरूनी खींचतान खत्म हुई, अब भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी आमने-सामने होंगे।
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नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। बगावत करके निर्दलीय पर्चा भरने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अनिल सोले ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला सुना दिया है।
दूसरी तरफ पार्टी के कामकाज के तरीके पर खुलकर नाराजगी जताते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले और सोले की बगावत का साथ देने वाले पूर्व विधायक गिरीश व्यास की नाराजगी भी भाजपा के बड़े नेता दूर करने में कामयाब रहे। व्यास ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।
इस तरह नागपुर भाजपा का आपसी विवाद ठंडा पड़ गया है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मनाने की कोशिश रंग लाई है। अब इस चुनाव में भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के बीच सीधा मुकाबला होगा।
मामला कुछ यूं था कि भाजपा ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को इस बार उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा। लेकिन इसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के इच्छुक पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अनिल सोले भी थे। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया। इसके बाद पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भी सोले के रुख का खुला समर्थन किया। नतीजा यह हुआ कि नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सामने अपने ही घर से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। ऐसे में पार्टी के बड़े नेताओं की कोशिशें कामयाब हुई हैं और अब नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस का सीधा सामना होगा।
चुनाव जीतने की तैयारी और रणनीति तय करने के लिए 12 अक्टूबर को नागपुर में भाजपा की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। उनके अलावा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, पार्टी के सभी विधायक और प्रमुख पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में पार्टी के भीतर की बगावत को शांत करने पर भी मंथन हुआ।
इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बागी उम्मीदवार अनिल सोले के घर पहुंचे और उन्हें समझाया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी अनिल सोले से बात करके उन्हें मनाने की कोशिश की। कुछ दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण भी अनिल सोले के घर गए थे, लेकिन तब सोले बाहर होने की वजह से उनसे मुलाकात नहीं हो पाई थी। आखिर में पार्टी के बड़े नेताओं की गुजारिश का मान रखते हुए अनिल सोले ने अपना नाम वापस ले लिया और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले को समर्थन दे दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कोहले को जिताने की अपील भी की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले पर कहा कि अनिल सोले वरिष्ठ नेता हैं और नागपुर में भाजपा को खड़ा करने में उनका हिस्सा रहा है। कार्यकर्ताओं को संभालने का काम वे करते आए हैं। फडणवीस के मुताबिक सोले ने पहले ही कहा था कि उन्हें पार्टी से नाराजगी नहीं है, नाराजगी कामकाज के तरीके को लेकर है। उनकी नाराजगी किसी खास फैसले पर नहीं थी, बल्कि इस पर थी कि फैसले की प्रक्रिया कैसे चलती है। उनका कहना था कि फैसला लेते समय ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शिकायतों को दर्ज कर लिया गया है और पार्टी के कामकाज के तरीके में बदलाव करने का तय किया गया है।
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