अनिल सोले और गिरीश व्यास भाजपा में लौटे, स्नातक सीट पर कोहले के लिए काम करेंगे सोले
मुख्यमंत्री फडणवीस से चर्चा के बाद पूर्व विधायक अनिल सोले पार्टी में वापस आ गए हैं और गिरीश व्यास ने इस्तीफा वापस ले लिया है। अब मुकाबले में कोहले और वंजारी आमने-सामने होंगे।
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नागपुर विधान परिषद की नागपुर स्नातक सीट के चुनाव में भाजपा के बागी उम्मीदवार रहे पूर्व विधायक अनिल सोले मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से बातचीत के बाद आखिरकार पार्टी में लौट आए हैं।
सोले ने मुख्यमंत्री और पालकमंत्री के सामने आश्वासन दिया कि वे इस चुनाव से अपना नाम वापस लेंगे और पार्टी उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में काम करेंगे। उनके साथ पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भी अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। दोनों पूर्व विधायकों के लौटने से भाजपा खेमे ने राहत की सांस ली है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोले और व्यास को पार्टी और संगठन के हित में फैसला लेने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सोले ने नामांकन भरने की वजहें खुले दिल से सामने रखीं और कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिन पर अमल किया जाएगा।
फडणवीस ने बताया कि सोले के साथ हुई चर्चा के दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, उपेन्द्र कोठेकर और सतीश धौड भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक सोले चाहते हैं कि पार्टी कितनी भी बड़ी हो जाए, कार्यप्रणाली नहीं बदलनी चाहिए, और वे हमारी कार्यप्रणाली से नाराज थे। फडणवीस ने कहा कि कई बार गलतियां हो जाती हैं, लेकिन उन्हें सुधारा जाएगा।
अनिल सोले ने पार्टी के पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को किनारे किए जाने की शिकायत भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी और संगठन में जिम्मेदारी दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी भावनाओं पर जरूर काम किया जाएगा।
फडणवीस ने यह भी कहा कि सोले ने कभी पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की। उलटे, वे पार्टी और संगठन से नाराज कार्यकर्ताओं को मनाकर साथ जोड़ने का काम करते थे। मुख्यमंत्री के अनुसार सोले पार्टी का नुकसान नहीं होने देंगे और पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार करेंगे। फडणवीस ने कहा कि सुधाकर कोहले सोले के विद्यार्थी रहे हैं और गुरु के रूप में वे अपने शिष्य को आशीर्वाद देंगे।
सोले तकनीकी रूप से अपना नामांकन वापस नहीं ले सकते। इसलिए वे अब अपने लिए प्रचार नहीं करेंगे और कोहले के समर्थन में काम करेंगे। यह घोषणा करते हुए वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि स्नातक सीट के लिए कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए वे बीते वर्षों से मेहनत कर रहे थे। जब पार्टी ने टिकट नहीं दी तो समर्थक कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुईं और उन्हीं भावनाओं के चलते उन्होंने नामांकन दाखिल किया। सोले के मुताबिक अब मुख्यमंत्री फडणवीस और पालकमंत्री बावनकुले ने उनकी भावनाएं समझी हैं और संगठन व कार्यप्रणाली में सुधार का आश्वासन दिया है।
अनिल सोले के समर्थन की घोषणा के साथ पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायक गिरीश व्यास से भी मुख्यमंत्री और पालकमंत्री की चर्चा हुई। व्यास ने कहा कि उन्होंने अपनी भावनाएं उनके सामने रखीं। सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया।
सोले के बागी होने से कांग्रेस खेमा खुश था कि उसके उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को इसका फायदा मिलेगा। अब सोले के लौटने से इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होगी। महाविकास आघाड़ी में शामिल राकांपा (शरदचंद्र पवार) के नितेश कराले भी मैदान में हैं, ऐसे में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।
उधर मुख्यमंत्री फडणवीस सुबह से शाम तक संभाग के सभी 6 जिलों के विधायकों से अलग-अलग बैठकें लेते रहे। कोराडी में उन्होंने नागपुर जिले के विधायकों की बैठक ली और पार्टी उम्मीदवार के लिए गंभीरता से काम करने का निर्देश दिया। इसके बाद रामगिरी में दिनभर जिलेवार बैठकें लेकर उन्होंने स्नातक चुनाव के संदर्भ में मार्गदर्शन किया।
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