नागपुर पदवीधर सीट: आल्हाद भांडारकर बोले, भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो भी लड़ेंगे चुनाव
आल्हाद भांडारकर ने भाजपा से उम्मीदवारी मांगी है और टिकट न मिलने पर अपक्ष नामांकन भरने की बात कही है।
राज्य में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। छत्रपति संभाजीनगर, पुणे और नागपुर में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें हैं, जबकि अमरावती और पुणे में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की। चुनाव से पहले ही भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि आल्हाद भांडारकर ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
भांडारकर शिक्षण महर्षि बापू साहेब लाखाणीकर के नाती हैं और कई दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। उन्होंने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने भाजपा से उम्मीदवारी मांगी है। संघ से जुड़े भांडारकर के इस रुख से नागपुर स्नातक चुनाव में मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है।
भाजपा से टिकट मिलना पक्का नहीं है, इसलिए भांडारकर 5 या 6 तारीख को अपक्ष (निर्दलीय) के तौर पर नामांकन भरेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि भाजपा ने उम्मीदवारी नहीं दी, तब भी वे चुनाव के मैदान में उतरेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ नागपुर जिले को ही प्राथमिकता क्यों दी जाती है।
गुस्से में भांडारकर ने पूछा, "भंडारा, गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर और वर्धा जैसे दूसरे जिलों में क्या योग्य स्नातक उम्मीदवार नहीं हैं?" जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भांडारकर का भंडारा जिले में शिक्षा संस्थाओं का बड़ा नेटवर्क है, जिससे इस चुनाव में मुकाबला कड़ा होने की संभावना है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है। विधान परिषद चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से अदिती पोहरे की उम्मीदवारी तय हुई है। पुणे की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर भाजपा, राष्ट्रवादी और शिवसेना शिंदे गुट, तीनों पार्टियां दावा कर रही हैं।
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के बाद शिवसेना शिंदे गुट ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की भी मांग की है। पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना शिंदे गुट के नेता भाऊसाहेब आंधळकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। आंधळकर इससे पहले शिवसेना की ओर से बार्शी विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
आंधळकर ने कहा, "मैंने पुणे स्नातक में बड़ी मोर्चाबंदी की है। इसलिए पार्टी मुझे दरकिनार न करे।" यानी उन्होंने मांग की है कि पार्टी उन्हें नजरअंदाज न करे।
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