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20:58 IST

नागपुर स्नातक चुनाव: कोहले के प्रचार के लिए शिक्षकों पर दबाव के आरोप, कांग्रेस ने वंजारी पर फिर लगाया दांव

नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के प्रचार को लेकर निजी शिक्षण संस्थानों पर कथित दबाव के आरोप सामने आए हैं।

नागपुर स्नातक चुनाव: कोहले के प्रचार के लिए शिक्षकों पर दबाव के आरोप, कांग्रेस ने वंजारी पर फिर लगाया दांव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है। भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के प्रचार के नाम पर निजी और अनुदानित शिक्षण संस्थानों पर कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों की वजह से शिक्षा क्षेत्र में नाराजगी की चर्चा है।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ संस्थानों के संचालकों पर कहा जा रहा है कि वे अपने शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को चुनाव प्रचार से जुड़ी बैठकों में हाजिर कराएं। आरोप है कि ऐसा न करने पर संस्थानों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों का दावा है कि यह दबाव भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के जरिए डाला जा रहा है। कथित तौर पर संचालकों से कहा जा रहा है कि वे सुधाकर कोहले के प्रचार के लिए शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को बैठकों में लेकर आएं, वरना उन्हें गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इस हालात से कुछ संचालकों में उलझन और नाराजगी है। खास तौर पर सार्वजनिक छुट्टी के दिन बैठकें रखे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, रविवार को खामला इलाके के अर्जुना सभागार में एक बड़े शैक्षणिक संस्थान की बैठक हुई। सोमवार दोपहर वर्धा रोड पर एक नामी सीबीएसई स्कूल में भी ऐसी ही बैठक होने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि कुछ संचालक संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के डर से इन बैठकों में खुद जाने या कर्मचारियों को भेजने के लिए मजबूर महसूस कर रहे हैं। इन बैठकों के मकसद और उनमें हाजिरी को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।

भाजपा ने इस चुनाव में सुधाकर कोहले को उम्मीदवार बनाया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और नागपुर जिले के प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोहले की उम्मीदवारी को लेकर पूर्व विधायक अनिल सोले की नाराजगी की खबरें पहले आई थीं। बताया गया था कि इस असंतोष को दूर करने की कोशिश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोले के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। पार्टी की तरफ से एकजुटता का संदेश दिए जाने के बावजूद चुनाव के दौरान भाजपा के भीतर असंतोष की चर्चा जारी है।

यह चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनता दिख रहा है और पार्टी इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों पर कथित दबाव के आरोपों से चुनावी माहौल और गरम हो गया है। अगर राजनीतिक प्रचार के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का डर दिखाकर कर्मचारियों की हाजिरी पक्की कराने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने पिछले चुनाव में उल्लेखनीय जीत दर्ज करने वाले अभिजीत वंजारी को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती सियासी होड़ को देखते हुए नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव काफी दिलचस्प रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर पाती है या कांग्रेस अभिजीत वंजारी की अगुवाई में अपनी बढ़त बनाए रखती है।

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