नागपुर स्नातक सीट पर बागी सोले डटे, गिरीश व्यास का भाजपा से इस्तीफा, पुणे में चिवटे और माने पीछे हटे
विधान परिषद की 5 सीटों के लिए नामांकन वापसी के आखिरी दिन पुणे में महायुति की बगावत थमी, जबकि नागपुर में भाजपा के प्रा. अनिल सोले ने निर्दलीय अर्जी कायम रखी।
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महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में नाम वापस लेने की आखिरी तारीख शुक्रवार को निकल गई। अब साफ हो गया है कि किस सीट पर कौन-कौन मैदान में रहेगा। जहां पार्टियों के अंदर बगावत हुई थी, वहां कुछ लोगों ने अपना नाम खींच लिया, लेकिन कुछ जगह बागी अपनी अर्जी पर अड़े हुए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा नागपुर की स्नातक सीट की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रा. अनिल सोले ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा था और आखिरी दिन तक वे पीछे नहीं हटे। पार्टी के लोगों ने उन्हें मनाने की खूब कोशिश की और दिनभर हल निकलने की बातें चलती रहीं, पर सोले नॉट रिचेबल हो गए और मैदान में बने रहे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अपने शहर में ही भाजपा बगावत को ठंडा नहीं कर पाई, यह बात अब सबके सामने है।
इस सीट से भाजपा ने सुधाकर कोहले को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अभिजित वंजारी पर फिर से भरोसा जताया है। सोले के डटे रहने से नागपुर संभाग की इस सीट पर अब तीनों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।
भाजपा की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बच्छराज व्यास के बेटे गिरीश व्यास ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सारे पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ऐलान किया है कि वे नागपुर स्नातक चुनाव में बागी अनिल सोले का साथ देंगे। इतना ही नहीं, महल इलाके में उन्होंने सोले के प्रचार के लिए दफ्तर भी खोल दिया है। नागपुर में भाजपा के लिए यह बड़ा झटका बताया जा रहा है।
पुणे का हाल इससे उलटा रहा। पुणे शिक्षक सीट से भाजपा ने कौस्तुभ गावड़े को टिकट दिया है। शिवसेना की तरफ से मंगेश चिवटे ने भी पर्चा भर दिया था, जिससे महायुति के भीतर पेच फंस गया था। आखिर में वरिष्ठ नेताओं के कहने पर चिवटे ने नाम वापस ले लिया। यानी इस सीट पर एकनाथ शिंदे को झुकना पड़ा।
पुणे की स्नातक सीट पर भाजपा ने स्मिता जाधव को उतारा है। यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस के सुनेत्रा पवार गुट के प्रताप उर्फ भैया माने ने भी नामांकन भर दिया था। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ, जनसुराज्य शक्ति पार्टी के नेता विनय कोरे और समित कदम ने उनसे गुजारिश की, जिसके बाद माने ने भी अपना नाम वापस ले लिया। दोनों बागियों के हटने से महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर बना तनाव कम हुआ है और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों की वजह से भाजपा के सामने खड़ी उलझन भी सुलझ गई है।
चुनाव जिन पांच सीटों पर होना है, उनमें पुणे की शिक्षक सीट, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक सीटें और अमरावती की शिक्षक सीट शामिल हैं। जहां बागी अब भी पर्चे पर कायम हैं, वहां महाविकास अघाड़ी और महायुति के अधिकृत उम्मीदवारों के बीच खींचतान बढ़ने की आशंका है।
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