नागपुर ग्रेजुएट सीट पर सुधाकर कोहले की जीत तय, बावनकुले का भरोसा
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर एयरपोर्ट पर कहा कि महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहले बड़े अंतर से जीतेंगे।
नागपुर ग्रेजुएट constituency से महायुति के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने नामांकन दाखिल कर दिया है। राजस्व मंत्री और नागपुर तथा अमरावती जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भरोसा जताया कि कोहले बड़े अंतर से जीतेंगे। उनके मुताबिक पिछले चुनाव में यह सीट जीती नहीं जा सकी थी, लेकिन इस बार महायुति के सभी घटक दल, पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
नागपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए बावनकुले ने ग्रेजुएट सीट के चुनाव, सूखा, पानी की किल्लत, आदिवासी छात्रों के आंदोलन, महायुति में सीटों के बंटवारे और दूसरे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
बीजेपी के पूर्व विधायक अनिल सोले के उम्मीदवारी से नाराज होने के बारे में पूछे जाने पर बावनकुले ने कहा कि यह नाराजगी कुछ वक्त की हो सकती है। उन्होंने कहा कि सोले से जरूर बात करके नाराजगी दूर की जाएगी। बावनकुले ने भरोसा जताया कि सोले अपना नामांकन वापस ले लेंगे।
अमरावती विधान परिषद सीट पर महायुति की बैठक में चर्चा हुई है और यह विचार रखा गया है कि यह सीट शिवसेना लड़े। बावनकुले ने साफ किया कि आखिरी फैसला और आधिकारिक ऐलान प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और महायुति के संबंधित दलों के अध्यक्ष मिलकर करेंगे।
बावनकुले ने बताया कि राज्य में सूखे के हालात बहुत गंभीर हैं। सोयाबीन और कपास को भारी नुकसान हुआ है और मक्के पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि रबी की फसल लेना भी मुश्किल हो सकता है, और आगे चारे और पीने के पानी की दिक्कत खड़ी हो सकती है।
बावनकुले के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को मदद देने पर विचार शुरू कर दिया है। फसल बीमा और NDRF व SDRF से मिलने वाली मदद किसानों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
चारे की कमी न हो, इसके लिए प्लानिंग चल रही है, ऐसा बावनकुले ने कहा। जहां नमी है, वहां 'माता जिजाऊ महिला सक्षमीकरण योजना' के तहत चारे की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और चारा विकास के काम भी हाथ में लिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विदर्भ के बड़े वन क्षेत्र का इस्तेमाल करके चारा तैयार करने की योजना है। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई है और जरूरी फंड दिलाने की कोशिश चल रही है।
किसानों के साथ खाना खाने के बारे में बावनकुले ने कहा कि यह पहले से तय कार्यक्रम नहीं था। किसान डब्बा लेकर आए थे और मुलाकात के दौरान उन्होंने प्यार से खाने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने किसानों के साथ झुणका-भाकर और ठेचा खाया। बावनकुले ने कहा कि सूखे के संकट में किसान दुखी है, फिर भी उसने अपने संस्कार और मेहमाननवाजी की परंपरा नहीं छोड़ी है।
चावल घोटाले की जांच पर बावनकुले ने कहा कि कोई दोषी पाया गया तो नियम के मुताबिक कार्रवाई होगी। जांच की रिपोर्ट आने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि जांच में गंभीर बातें मिलीं तो आपराधिक मामले भी दर्ज हो सकते हैं।
एक महिला संपादक को ट्रोल किए जाने पर बावनकुले ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की संस्कृति और संस्कार बचाए रखने चाहिए और महिला संपादक के साथ ऐसा बर्ताव महाराष्ट्र की परंपरा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ट्रोल करने वालों को ढूंढकर कार्रवाई करे। पत्रकारों के साथ मारपीट करना या उन्हें ट्रोल करना ठीक नहीं है और पुलिस को इस मामले में सख्त रुख अपनाना चाहिए।
आदिवासी छात्रों के आंदोलन पर बावनकुले ने कहा कि आंदोलन का अधिकार हर किसी को है, लेकिन आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। आंदोलन करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि सरकारी संपत्ति या समाज को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि आंदोलन आक्रामक हो तो भी तोड़फोड़ करना ठीक नहीं है।
पानी की किल्लत की आशंका पर बावनकुले ने बताया कि सरकार की तरफ से प्लानिंग शुरू है। हर शहर में पानी की उपलब्धता और जरूरत का आकलन करके उसके हिसाब से SOP बनाई जा रही है। उन्होंने साफ किया कि पानी के इस्तेमाल में सबसे पहले पीने के पानी को तरजीह दी जाएगी।
महायुति में सीट बंटवारे पर बावनकुले ने कहा कि सकारात्मक बातचीत चल रही है। कभी किसी पार्टी को बढ़त मिलती है, कभी दूसरी को, मगर महायुति में फैसले बातचीत से होते हैं। उनके मुताबिक मौजूदा सीटें संबंधित पार्टी ही लड़े, इस 'सिटिंग-गेटिंग' सिद्धांत पर शुरुआती विचार है और बाकी सीटों पर आपसी समझ से फैसला होगा।
बावनकुले ने कहा कि कुछ लोगों ने नामांकन दाखिल किए हैं, पर नाम वापसी के आखिरी दिन तक हालात बदल सकते हैं। जहां बगावत हुई है, वहां संबंधित उम्मीदवारों से बात करके उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश होगी।
मुंबई एयरपोर्ट के रनवे की मरम्मत पर बावनकुले ने कहा कि रनवे में कोई दिक्कत आई हो या आगे बड़ी परेशानी की आशंका हो, तो उसकी मरम्मत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से जरूरी मरम्मत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और इस पर आरोप-प्रत्यारोप की जरूरत नहीं है।
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