नागपुर पदवीधर सीट: भाजपा के कोहळे के सामने बागी सोले और कांग्रेस के वंजारी
भाजपा ने सुधाकर कोहळे को उम्मीदवार बनाया है, जबकि पार्टी के पूर्व विधायक अनिल सोले ने निर्दलीय नामांकन भरा है।
नागपुर पदवीधर मतदारसंघ का चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा ने इस सीट के लिए सुधाकर कोहळे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अनिल सोले ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। सोले ने साफ कर दिया है कि वह अपना नामांकन वापस नहीं लेंगे।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा गुरु और शिष्य की टक्कर की है। सुधाकर कोहळे खुद अनिल सोले को अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। अपने राजनीतिक सफर में सोले से मार्गदर्शन लेने वाले कोहळे अब उसी नेता के सामने चुनाव मैदान में हैं।
सोले के निर्दलीय उतरने से भाजपा के सामने अपने ही खेमे के अंदर चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए दोनों नेताओं के समर्थकों को साथ लाना बड़ी चुनौती बन सकता है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने अभिजीत वंजारी को उम्मीदवार बनाया है। वंजारी पिछले चुनाव में भाजपा के संदीप जोशी को हराकर नागपुर पदवीधर सीट जीत चुके हैं। इसी वजह से इस बार भी उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है।
यानी अब मैदान में एक तरफ भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहळे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के अभिजीत वंजारी और भाजपा के बागी उम्मीदवार अनिल सोले।
कोहळे की पिछली विधानसभा चुनाव की पारी भी चर्चा में रही थी। दक्षिण नागपुर में रहने वाले कोहळे को भाजपा ने पश्चिम नागपुर विधानसभा सीट से उतारा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद पार्टी ने अब नागपुर पदवीधर मतदारसंघ के लिए उन पर भरोसा जताया है।
नागपुर पदवीधर सीट पर मुकाबला अब सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह गया है। कोहळे के सामने उनके अपने राजनीतिक गुरु अनिल सोले निर्दलीय खड़े हैं, और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी पहले से ही मजबूत दावेदार हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा की अंदरूनी कलह सुधाकर कोहळे की राह मुश्किल करेगी। या फिर पार्टी अपने नाराज खेमे को साधकर मुकाबला अपने पक्ष में कर पाएगी।
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