नागपुर स्नातक चुनाव में बागी हटे, फिर भी बीजेपी और कांग्रेस में भीतरघात की आशंका
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार प्रचार में जुटे हैं, पर दोनों पार्टियों में नाराजगी और गुटबाजी की चर्चा बनी हुई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में नामांकन दाखिल करने से लेकर नाम वापसी की तारीख तक जो कुछ हुआ, उसके बाद बीजेपी के बागी मैदान से हट गए। फिर भी नाराजगी के सुर थमे नहीं हैं। उधर कांग्रेस में आपसी गुटबाजी की तस्वीरें अब भी दिख रही हैं।
दोनों चिरप्रतिद्वंद्वी पार्टियों के अधिकृत उम्मीदवार अब जोर-शोर से प्रचार में लगे हैं। लेकिन ऊंट किस करवट बैठेगा, यह राजनीति के जानकारों के लिए भी भांपना मुश्किल हो रहा है।
कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के समर्थन में हाल ही में राज्य प्रभारी सिरिवेल्ला की मौजूदगी में एक सम्मेलन हुआ। इसमें उत्तर नागपुर के नेता नजर नहीं आए। वहां मौजूद सभी नेताओं ने एकजुटता पर जोर दिया और कार्यकर्ताओं से वंजारी के लिए काम करने की अपील की। फिर भी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अपने भाषण में गुटबाजी की तरफ इशारा किया।
बीजेपी की बात करें तो कहा जा रहा है कि पार्टी में हजारों कार्यकर्ता अपने ही नेताओं से नाराज हैं। पूर्व विधायक अनिल सोले जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता, जो कभी पार्टीलाइन से बाहर नहीं गए थे, उन्होंने उम्मीदवारी तय करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए बगावत कर दी थी। नामांकन वापसी की तारीख को जब उन्होंने नाम वापस नहीं लिया, तो सीएम को खुद उनके घर जाना पड़ा।
बताया जाता है कि सोले ने सीएम के सामने भी अपनी भड़ास निकाली। कहा जा रहा है कि वे मान गए हैं और उन्होंने सुधाकर कोहले के समर्थन में काम करने की बात कही है। पर यह भी कहा जा रहा है कि उनका चेहरा और बॉडी लैंग्वेज कुछ और ही कहानी कह रहे थे।
सोले के समर्थक अब भी बुरी तरह भड़के हुए हैं। चर्चा यह है कि वर्ष 2020 के चुनाव में संदीप जोशी की जिस तरह हार हुई थी, कहीं वही नतीजा इस बार भी न दोहराया जाए। नाना पटोले ने दावा किया है कि ग्रामीण के साथ शहरी इलाकों में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है और वे अपनी भावनाएं जाहिर भी कर रहे हैं।
कांग्रेस में भी सब ठीक नहीं बताया जा रहा। शहर और जिला कांग्रेस की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। पूर्व शहराध्यक्ष विकास ठाकरे ने प्रफुल गुडधे के अध्यक्ष बनने के बाद हुए समारोह में खुलेआम बताया था कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने के लिए पार्टी के ही कुछ नेता जुटे हुए थे। उन्होंने गुडधे को ऐसे लोगों से सावधान रहने की हिदायत भी दी थी।
फिलहाल शहर और जिला कांग्रेस के नेता स्नातक चुनाव में वंजारी को जिताने के लिए एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कौन कितना साथ देता है, यह नतीजा ही बताएगा। सम्मेलन से उत्तर नागपुर के नेताओं की दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है। वंजारी को विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के साथ-साथ पार्टी के भीतरी विभीषणों को पहचानकर चुनाव लड़ना होगा।
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