स्नातक चुनाव में उद्योग, रोजगार और पेपर लीक का मुद्दा उठेगा: हर्षवर्धन सपकाल
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर मुद्दे गिनाए।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में लोकतंत्र की रक्षा और विकास को गति देना प्रमुख मुद्दे होंगे। उनके मुताबिक महाराष्ट्र से उद्योग बाहर जा रहे हैं, डिग्री होने के बावजूद विद्यार्थियों को रोजगार नहीं मिल रहा और पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। सपकाल ने यह बात पत्रकारों से बातचीत में कही।
सपकाल उस वक्त मौजूद थे जब स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इसी मौके पर उन्होंने पत्रकारों से बात की।
सपकाल ने कहा कि देशभर में 40,000 से अधिक आंदोलन चल रहे हैं। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय की दृष्टि से जातिगत जनगणना का मुद्दा भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा।
मुंबई के कांग्रेस कार्यालय में हुई घटनाओं को लेकर सपकाल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस की तरफ से गलत जानकारी दी जा रही है, तो पुलिस को साफ करना चाहिए कि उसे किसका आदेश मिला है।
सपकाल ने दावा किया कि उनके पास सीसीटीवी फुटेज हैं और कांग्रेस के एनएसयूआई अध्यक्ष को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी अनुमति के कांग्रेस मुख्यालय में घुस गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी देते हुए सपकाल ने कहा, "देवेंद्र फडणवीस, अब बहुत हो गया। यदि आप अपने पुलिसकर्मियों को हमारे घर में भेजोगे तो हमें भी आपके 'वर्षा' निवास तक आना पड़ेगा।"
अमरावती निर्वाचन क्षेत्र को लेकर सपकाल ने दावा किया कि वहां बगावत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी के घटक दलों की भूमिका एक-दूसरे की पूरक रहेगी और किसी तरह का मतभेद या बगावत नहीं होगी। उनके अनुसार सभी दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि ओबीसी का मुद्दा भी रहेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के लगातार दबाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी की जनगणना कराने का फैसला लिया, लेकिन इसके लिए अलग कॉलम नहीं है।
पटोले के मुताबिक इससे समाज में बड़े पैमाने पर असंतोष है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जब तक सरकार ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं करती, तब तक यह बना रहेगा।