अमरावती शिक्षक सीट पर श्रीकांत देशपांडे ने भरा पर्चा, पार्टी टिकट न दे तो भी लड़ने की बात
शिवसेना नेता और पूर्व विधायक श्रीकांत देशपांडे ने महायुती का उम्मीदवार तय होने से पहले अमरावती शिक्षक मतदारसंघ से नामांकन दाखिल किया है।
राज्य में विधान परिषद के पदवीधर और शिक्षक मतदारसंघों के चुनाव की हलचल शुरू हो गई है। पुणे पदवीधर, पुणे शिक्षक, नागपुर पदवीधर, छत्रपती संभाजीनगर पदवीधर और अमरावती शिक्षक, यानी कुल पांच मतदारसंघों में चुनाव हो रहा है। इन सीटों की उम्मीदवारी को लेकर महायुती और महाविकास आघाडी, दोनों के घटक दलों में दावे और जवाबी दावे चल रहे हैं।
इसी माहौल में अमरावती शिक्षक मतदारसंघ से शिवसेना नेता और पूर्व विधायक श्रीकांत देशपांडे ने उम्मीदवारी अर्ज दाखिल कर अपना रुख साफ कर दिया है। महायुती का अधिकृत उम्मीदवार अभी घोषित भी नहीं हुआ था कि देशपांडे मैदान में उतर गए। इससे इस मतदारसंघ की राजनीति में तेजी आ गई है।
श्रीकांत देशपांडे ने बताया कि वे अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही शिवसेना में काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि पार्टी के टिकट पर पहला हक उन्हीं का है। उन्होंने यह भी रुख रखा है कि अगर पार्टी ने उम्मीदवारी नहीं दी, तब भी वे चुनाव से पीछे नहीं हटेंगे और शिक्षक आघाडी के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे।
अमरावती विभाग शिक्षक मतदारसंघ में पांच जिले आते हैं: अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशिम और यवतमाल। इस मतदारसंघ के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग होने की खबर है। अधिकृत चुनाव सूचना के मुताबिक उम्मीदवारी अर्ज दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर 2026 है।
उधर पुणे पदवीधर और शिक्षक मतदारसंघों की सीटों पर भी महायुती के भीतर खींचतान चल रही है। इन दोनों मतदारसंघों के लिए 2026 की चुनाव प्रक्रिया अधिकृत तौर पर शुरू हो चुकी है, और पुणे के विभागीय आयुक्त कार्यालय ने इसके लिए अलग से जानकारी उपलब्ध कराई है।
उम्मीदवारी अर्ज, पार्टी के भीतर के दावे और संभावित बगावत की वजह से शिक्षक और पदवीधर मतदारसंघों का चुनाव राजनीतिक तौर पर अहम बनता जा रहा है। अमरावती में देशपांडे के रुख के बाद अब नजर इस बात पर है कि महायुती अधिकृत उम्मीदवारी किसे देती है और उसके बाद देशपांडे क्या कदम उठाते हैं।
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