नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा के कोहले के सामने पूर्व विधायक अनिल सोले भी उतरेंगे
भाजपा ने सुधाकर कोहले को उम्मीदवार घोषित किया, पूर्व विधायक अनिल सोले ने भी निर्दलीय लड़ने का ऐलान किया।
विधान परिषद के नागपुर संभाग स्नातक चुनाव क्षेत्र के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से उम्मीदवारी को लेकर जो उत्सुकता बनी हुई थी, वह अब खत्म हो गई है। कोहले का नाम अपेक्षा के अनुरूप ही आया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर कोहले को मतदाता पंजीयन प्रमुख बनाया गया था। तभी से माना जा रहा था कि उम्मीदवारी उन्हीं को मिलेगी। लेकिन कोहले के नाम की अधिकृत घोषणा होते ही पूर्व विधायक अनिल सोले ने बगावत कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐलान किया है कि वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे।
सोले भी 5 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं। नागपुर भाजपा में हुई इस बगावत से पार्टी के आलानेताओं की सिरदर्दी बढ़ गई है। राजनीतिक महकमे में इस बात पर आश्चर्य जताया जा रहा है कि सोले जैसा कर्मठ और अब तक पार्टी के साथ वफादार रहा व्यक्ति कैसे बगावत कर सकता है।
सोले की बगावत से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की भी चिंता बढ़ गई है। नागपुर मुख्यमंत्री का गृहनगर है और गडकरी का गढ़ माना जाता है। यहां पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता का इस तरह बगावत करना संभवतः पहली बार हुआ है।
अनिल सोले वर्ष 2014 में इसी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। नितिन गडकरी के लोकसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी और तब उन्हें मौका दिया गया था। पार्टी को चिंता यह है कि अगर सोले ने नामांकन भरा और मैदान में डटे रहे, तो अधिकृत उम्मीदवार कोहले को भारी नुकसान हो सकता है।
हालात को काबू में रखने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अनिल सोले से संपर्क कर उन्हें मनाने और अपना रुख बदलवाने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी संगठन के भीतर से भी उन पर पर्चा न भरने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वोटों का बिखराव रोका जा सके।
हालांकि अनिल सोले के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं और चुनाव मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इससे इस मुकाबले के और भी दिलचस्प होने के आसार बन गए हैं।
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