नागपुर स्नातक सीट: अनिल सोले के घर पहुंचे रवींद्र चव्हाण, परिवार ने सुनाई खरी-खोटी
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में निर्दलीय नामांकन भरने वाले अनिल सोले को मनाने गए BJP प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को परिवार के गुस्से का सामना करना पड़ा।
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर कलह बढ़ गई है। पूर्व MLC और वरिष्ठ नेता अनिल सोले ने भाजपा से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। उन्हें मनाने के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण उनके घर पहुंचे।
चव्हाण अचानक नागपुर में सोले के आवास पर गए थे। मकसद था सोले की उम्मीदवारी वापस कराना। उनके साथ स्थानीय विधायक कृष्णा खोपड़े, राजू पोतदार और शिवानी दाणी भी थीं। लेकिन उस वक्त अनिल सोले घर पर नहीं थे।
जब प्रदेश अध्यक्ष ने परिवार वालों से बात करने की कोशिश की, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने रवींद्र चव्हाण और उनके साथ आए नेताओं को खरी-खोटी सुनाई और तीखे सवाल पूछे। नतीजा यह रहा कि चव्हाण को खाली हाथ लौटना पड़ा।
परिजनों ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि अनिल सोले पिछले 50 साल से बिना किसी स्वार्थ के भाजपा की सेवा कर रहे हैं। उनका कहना था कि संगठन को मजबूत करने में सोले ने कभी किसी पद की उम्मीद नहीं रखी। परिजनों ने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें समय-समय पर जिम्मेदारी और सम्मान दिया है।
परिवार वालों ने सवाल उठाया कि करीब 6 महीने पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आशीर्वाद सोले को मिल चुका था। तो फिर आखिरी वक्त पर उनका टिकट आधार पर क्यों काट दिया गया, यह परिजनों ने पूछा।
अनिल सोले इस नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के 'मास्टर' माने जाते हैं। वे इस सीट से पहले भी चुनाव जीत चुके हैं और इलाके के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ सोले का मैदान में डटे रहना भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है। उनके मुताबिक अगर सोले अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं लेते, तो इस सीट पर भाजपा के वोट बंट सकते हैं और पार्टी की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।