नागपुर स्नातक चुनाव: नामांकन भरकर संपर्क से बाहर हुए सोले, भाजपा में बेचैनी
भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रो. अनिल सोले नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर को भी सस्पेंस बने हुए हैं।
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नागपुर स्नातक चुनाव में भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रो. अनिल सोले ने नामांकन तो भर दिया, लेकिन उसके बाद वे 'नॉट रिचेबल' हो गए। इससे पार्टी में बेचैनी है। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले और उनके समर्थक भी सोले के रवैये की वजह से उलझन में हैं।
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख आज, यानी 9 अक्टूबर है। पार्टी के ही एक भरोसेमंद सूत्र के मुताबिक सोले अपना नाम वापस लेने वाले हैं। यह भी बताया गया है कि 'वाड़ा' से उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया है। अगर अब तक अड़े रहे सोले सच में नाम वापस ले लेते हैं, तो यह सिर्फ कोहले के लिए नहीं, पूरी पार्टी के लिए राहत की बात होगी। वजह यह है कि उन्हें मनाने की कोशिश करने वालों के हाथ अब तक कुछ नहीं लगा है।
एक बात और। सोले ने पहले अधिकृत उम्मीदवार कोहले के नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी, फिर बाद में खुद ही वह आपत्ति वापस ले ली। इसी से अंदाजा लगने लगा कि वे आखिरी वक्त तक नाम वापस ले सकते हैं। फिर भी जब तक सोले नामांकन वापस नहीं लेते, पार्टी नेताओं की चिंता खत्म होने वाली नहीं है।
इधर भाजपा ने तीन दिन पहले ही नेताओं की एक बड़ी टीम खड़ी की थी। अब करीब 40 और नेताओं को जिला प्रभारी और विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के चुनाव प्रमुख विधायक प्रवीण दटके ने गुरुवार को 40 प्रभारी और सहप्रभारियों के नाम घोषित किए। हर जिले के लिए अलग से पालक भी नियुक्त किए गए हैं।
नागपुर के पालक विधायक परिणय फुके हैं, जबकि शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी को चुनाव प्रमुख बनाया गया है। दक्षिण-पश्चिम नागपुर में संदीप जोशी और रमेश भडारी को जिम्मेदारी मिली है। पश्चिम नागपुर में श्रीकांत आगलावे, संजय बंगाले, अनिरुद्ध पालकर और किशन गावंडे प्रभारी हैं। मध्य नागपुर में गिरीश पुराणिक और रामभाऊ आंबुलकर को प्रभारी बनाया गया है। दक्षिण नागपुर में मोहन मते और येवेन दस्तुरे, उत्तर नागपुर में संदीप जाधव और मिलिंद माने, जबकि पूर्व नागपुर में कृष्णा खोपड़े और प्रमोद पेंडके को काम सौंपा गया है।
उधर सोले 9 अक्टूबर की शाम को बड़कस चौक में अपना चुनाव प्रचार कार्यालय शुरू करने वाले हैं। यह कार्यालय भाजपा के पूर्व विधायक गिरीश व्यास का है, जो संघ के करीबी समझे जाते हैं। यह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और स्नातक चुनाव प्रमुख विधायक प्रवीण दटके के निवास के पास है। कोहले को अधिकृत उम्मीदवारी मिलने के बाद लगा था कि पार्टी के बाकी नेता सोले से दूरी बना लेंगे, मगर व्यास ने उन्हें अपना कार्यालय दे दिया।
चुनाव की घोषणा के बाद व्यास और संजय भेंडे ने सोले के सत्कार का कार्यक्रम रखा था, जिसमें गडकरी भी मौजूद थे। कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर सोले का प्रचार कर रहे हैं। यह कोहले ही नहीं, भाजपा के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
सोशल मीडिया पर यह खबर भी वायरल है कि सोले बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में डटे रहेंगे। बुधवार को गडकरी के निवास पर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक हुई थी। उसमें सोले का नामांकन वापस कराने के लिए गडकरी की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान फोन पर सोले से संपर्क करने की कोशिश भी की गई, पर बात नहीं हो सकी। गुरुवार को दोपहर के बाद सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें फैलने लगीं, जिनमें दावा था कि सोले नामांकन वापस नहीं लेंगे।