नागपुर पदवीधर जीत का श्रेय: विधायक विकास ठाकरे बोले, मेहनत किसने की वंजारी जानते हैं
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नागपुर पदवीधर चुनाव में अभिजित वंजारी की जीत के बाद कांग्रेस के दो गुटों में श्रेय को लेकर चर्चा तेज है। विधायक विकास ठाकरे ने कहा कि असली मेहनत किसने की, यह वंजारी खुद जानते हैं।
नागपुर पदवीधर मतदाता संघ से विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजित वंजारी (Abhijit Wanjari) जीत गए हैं। जीत के बाद अब इस बात की चर्चा है कि इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए। नागपुर कांग्रेस के दो गुटों के बीच श्रेय को लेकर खींचतान चलने की बात कही जा रही है।
इसी माहौल में कांग्रेस के विधायक विकास ठाकरे (Vikas Thakre) ने फोटो खिंचवाने वाले कांग्रेस नेताओं पर टिप्पणी की। ठाकरे का कहना है कि जो स्थानीय नेता प्रचार के दौरान दिखाई नहीं दिए, वे अब श्रेय लेने के लिए आगे आ रहे हैं और फोटो को भुना रहे हैं। उनके मुताबिक असल में किसने मेहनत की, यह खुद अभिजित वंजारी को पता है। उनकी इस टिप्पणी से विवाद और बढ़ने की संभावना है।
मामला एक फोटो से जुड़ा है। अभिजित वंजारी जब चुनाव अधिकारियों से जीत का प्रमाणपत्र ले रहे थे, तब उस फोटो में सुनील केदार (Sunil Kedar) मौजूद थे। बताया जा रहा है कि सुनील केदार के समर्थकों ने उसी फोटो को भुनाना शुरू कर दिया। उनका संदेश यह है कि दिल्ली तक नागपुर जिले में केदार की ही हवा है।
इससे दूसरा गुट नाराज हुआ। इस गुट ने सुनील केदार का नाम लिए बिना कहा कि प्रचार के समय गायब रहने वाले नेता अब सामने आ गए हैं।
इस सबके बीच विकास ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस की जीत हुई है और इस बात की उन्हें खुशी है।
नागपुर में भाजपा की हार के दस कारण भी गिनाए गए हैं। इनमें उम्मीदवार तय करते समय नागपुर भाजपा में खुली फूट और अनिल सोले का गिरीश व्यास के साथ मिलकर बगावत करना शामिल है। कहा गया है कि बगावत शांत हो गई, पर नुकसान हो चुका था। यह भी गिनाया गया कि भाजपा के पारंपरिक मतदाताओं ने मतदान से परहेज किया या वोट अवैध करके नाराजगी जताई। चुनाव प्रबंधन में पहली पसंद के 4,291 अतिरिक्त वोट मिले, पर दूसरी पसंद के वोटों पर ध्यान नहीं दिया गया। छोटे दलों और उनके उम्मीदवारों के दूसरी और तीसरी पसंद के वोटों की अनदेखी हुई, जबकि वंजारी ने दूसरे उम्मीदवारों के संपर्क में रहकर ये वोट मांगे और यही निर्णायक रहे।
नितेश कराले को 24,249 वोट मिले, जो पिछली बार से साढ़े तीन गुना हैं। इन वोटों से भाजपा और कांग्रेस दोनों का गणित बिगड़ा। कराले के दूसरी पसंद के वोट वंजारी को मिलना आखिर में निर्णायक रहा। सूची के मुताबिक भाजपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं दिया, इसलिए ब्राह्मण मतदाताओं में नाराजगी दिखी।
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