गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

नागपुर पदवीधर सीट: कराले की दूसरी पसंद ने पलटा खेल, कांग्रेस के वंजारी 3271 वोट से जीते

नागपुर पदवीधर सीट: कराले की दूसरी पसंद ने पलटा खेल, कांग्रेस के वंजारी 3271 वोट से जीते तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

विधान परिषद के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने पहली और दूसरी पसंद के कुल 67 हजार 231 वोट पाकर जीत दर्ज की। भाजपा के सुधाकर कोहले को 63 हजार 960 वोट मिले।

नागपुर की पदवीधर (स्नातक) सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर ली है। विधान परिषद के इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3271 वोट से हराया। पहली और दूसरी पसंद के वोट जोड़कर वंजारी के खाते में 67,231 वोट आए और कोहले के खाते में 63,960। निर्दलीय नितेश कराले, जिन्हें सब कराले गुरुजी कहते हैं, को कुल करीब 25,909 वोट मिले। कुछ रिपोर्टों में यही आंकड़ा 25,908 लिखा गया है।

गिनती 41 घंटे से ज्यादा चली। कुछ रिपोर्टों में इसे 40 घंटे और कुछ में 45 घंटे बताया गया है। नतीजा 29 अक्टूबर को घोषित हुआ। निर्वाचन निर्णय अधिकारी और विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने वंजारी को जीत का प्रमाणपत्र सौंपा। गिनती के दौरान चुनाव निरीक्षक डॉ. हर्षदीप कांबले, सभी जिलों के सहायक निर्वाचन अधिकारी यानी कलेक्टर और तैनात स्टाफ वहां मौजूद रहे।

चुनाव का पूरा कार्यक्रम कुछ यूं रहा। भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को तारीखें घोषित कीं और 29 सितंबर को अधिसूचना जारी हुई। वोट 23 अक्टूबर को सुबह 8 से शाम 4 बजे के बीच पड़े। गिनती 27 अक्टूबर की सुबह 8 बजे मानकापुर के विभागीय क्रीड़ा संकुल में 84 टेबल पर शुरू हुई। आयोग ने पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक निपटाने का समय तय किया था।

इस सीट पर 2,55,603 मतदाता दर्ज थे और 1,65,672 ने वोट डाले। जिलेवार मतदान चंद्रपुर में 73.05 फीसदी, गढ़चिरौली में 72.95, गोंदिया में 71.29, वर्धा में 68.35, भंडारा में 67.07 और नागपुर जिले में सबसे कम, 60.35 फीसदी रहा। कुल 445 केंद्रों की 788 पेटियों से 1,65,705 मतपत्र निकले। उनमें 204 वैध पोस्टल बैलेट जुड़े। मैदान में 38 उम्मीदवार थे, इसलिए हर उम्मीदवार के लिए अलग डिब्बा रखा गया, एक डिब्बा संदिग्ध मतपत्रों के लिए, यानी कुल 39 डिब्बे।

गिनती की शुरुआत पोस्टल बैलेट से हुई। 238 पोस्टल मतपत्रों में से 34 अवैध निकले। बाकी 204 में वंजारी को 101, कोहले को 86 और बाकी उम्मीदवारों को 17 वोट मिले। यानी डाक वोटों में वंजारी 15 वोट आगे रहे। इसके बाद पहली पसंद के वोटों की असली गिनती दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई।

पहले राउंड में 84,003 वोट गिने गए, जिनमें 76,875 वैध और 7,128 अवैध थे। वंजारी 28,998 वोट लेकर 927 वोट से आगे रहे। कोहले को 28,071 और कराले को 14,708 वोट मिले। बाकी में संजय थुल को 1,762, मंगेश वानखेडे को 642, धनंजय बोरकर को 612, अतुल देशमुख को 576 और सुमेध गडपायले को 521 वोट मिले। इसी राउंड में पूर्व विधायक अनिल सोले को भी वोट मिले। उन्होंने नाम वापसी की आखिरी तारीख पर पर्चा वापस नहीं लिया था, इसलिए मतपत्र पर उनका नाम बना रहा, हालांकि बाद में उन्होंने मैदान से हटने का एलान कर दिया था।

दूसरे राउंड में तस्वीर पलट गई। कोहले को इस राउंड में 32,853 वोट मिले और उनका कुल आंकड़ा 60,924 हो गया। वंजारी के 27,632 वोट जुड़कर कुल 56,630 हुए। कराले को 9,541 वोट और मिले और उनके कुल 24,249 हो गए। कोहले करीब 4,294 वोट से आगे हो गए। कुछ रिपोर्टों में यह बढ़त 4,291 बताई गई है। एक रिपोर्ट में दूसरे राउंड के आंकड़े थोड़े अलग छपे थे, पर कुल जोड़ ऊपर वाला ही रहा। उस वक्त कुल 1,65,906 वोट पड़े थे, जिनमें 15,032 अवैध निकले और 1,50,874 वैध रहे। इस हिसाब से जीत का कोटा 75,438 वोट बना। कोहले को कोटे के लिए 14,514 और वंजारी को 18,808 वोट चाहिए थे। बाकी उम्मीदवारों के कुल वोट थुल 3,091, गडपायले 1,096, वानखेडे 1,029, देशमुख 921 और बोरकर 849 थे।

चूंकि कोई कोटा नहीं छू सका, इसलिए एलिमिनेशन शुरू हुआ और दूसरी पसंद के वोट गिने जाने लगे। शुरुआती गिनती में कुछ उम्मीदवारों के मतपत्रों से बहुत छोटे आंकड़े भी आए, जैसे कोहले को 56, वंजारी को 63 और कराले को 48 वोट। 28 उम्मीदवारों के बाहर होने तक कोहले के 61,029 और वंजारी के 56,785 वोट थे, यानी 4,244 वोट का फासला। अनिल सोले के 274 वोट (267 पहली पसंद और 7 पोस्टल) में दूसरी पसंद कोहले को 88, वंजारी को 41 और कराले को 10 मिली। कोहले की बढ़त 30 उम्मीदवारों की गिनती के बाद करीब 5,000 तक पहुंची। फिर अंतिम तीन उम्मीदवारों के वोट गिनने पर घटकर करीब 1,200 रह गई, जबकि कराले के लगभग 14,000 वोट अभी गिनने बाकी थे। बुधवार शाम से रात के बीच जब कराले के मतपत्रों की दूसरी पसंद खुलनी शुरू हुई, तो उनमें से ज्यादातर वंजारी के हिस्से गईं। चार हजार के आसपास पीछे चल रहे वंजारी एक-दो घंटे में आगे निकल गए और आखिर में जीत गए। कोहले ने बीच में कहा था कि 36वें राउंड तक वे तीन हजार वोट से आगे हैं।

कोहले ने हार के बाद भाजपा के करीब 9 हजार वोट रद्द होने की बात कही। उनके मुताबिक कई मतदाताओं ने उनके नाम के आगे 1 की जगह 2 लिख दिया। उन्होंने कहा था, "भाजपा के जिन मतदाताओं ने मेरे पसंद क्रम के आगे '1' न लिखकर '2' लिखा, उनसे मेरी गुजारिश है कि लोकतंत्र के लिए ऐसा मतदान ठीक नहीं है। पूरी गिनती खत्म होने तक हम हार नहीं मानेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता हार का विश्लेषण करेंगे। एक अलग रिपोर्ट में दावा है कि 3,000 से ज्यादा मतपत्रों में सिर्फ कोहले के आगे 2 लिखा था और 15,000 से ज्यादा वोट खारिज हुए, पर इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गिनती के बीच कोहले ने गलत तरीके से अवैध ठहराए गए वोटों की दोबारा जांच मांगी थी और नतीजा गलत आने पर कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी थी।

कराले का कहना है कि भाजपा के खिलाफ नाराजगी थी, इसलिए दो नंबर का वोट वंजारी को गया। उनके शब्दों में, "भाजपा ने दो नंबर का वोट मांगा नहीं, यह उनके लिए घातक साबित हुआ।" गिनती शुरू होने के वक्त कराले ने पहले ही दौर में 40 से 45 हजार वोट मिलने का दावा किया था। उन्होंने एक पेटी से 8 मत ज्यादा निकलने पर आपत्ति भी जताई थी। भाजपा के अंदरूनी सर्वे में उन्हें 15 हजार के आसपास वोट का अंदाजा था। 2020 की तुलना में कराले के वोट साढ़े तीन गुना बताए गए हैं।

वंजारी 10 मई 1973 को नागपुर में जन्मे, पेशे से वकील हैं और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी कर चुके हैं। वे विश्वविद्यालय की सीनेट और प्रबंधन परिषद के सदस्य रहे। 1998 से 2002 तक वे महाराष्ट्र प्रदेश NSUI के महामंत्री थे, फिर प्रदेश युवक कांग्रेस के सचिव बने। उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक भी रहे और नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी में महामंत्री व प्रवक्ता रहे। उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर से दो बार विधायक रहे। उन्होंने 2005 का दक्षिण नागपुर उपचुनाव और 2014 का पूर्व नागपुर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। 2020 में उन्होंने भाजपा के संदीप जोशी को हराया था, तब वंजारी को 61,701 और जोशी को 42,791 वोट मिले थे और जीत का अंतर 18,919 रहा था। इस सीट पर 1978 के बाद कांग्रेस 42 साल में पहली बार जीती थी।

इस बार भाजपा के भीतर कोहले की उम्मीदवारी पर नाराजगी थी। पिछली बार टिकट न पाने वाले अनिल सोले ने बगावत की थी और बताया गया है कि गिरीश व्यास भी उनके साथ थे। 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दो दिन नागपुर में रुककर सोले के घर गए और उन्हें मनाया। सोले ने कोहले को समर्थन दिया, फिर भी कुछ मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया। कोहले को विधानसभा चुनाव में पश्चिम नागपुर से विकास ठाकरे के सामने हार भी मिली थी। नतीजे के बाद भाजपा के पारंपरिक वोटरों के बंटने, कार्यकर्ताओं के अति आत्मविश्वास, दूसरी और तीसरी पसंद की अनदेखी और ब्राह्मण उम्मीदवार न देने जैसी वजहें गिनाई जा रही हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण जिलों का हिसाब लेंगे और 2 नवंबर को अमित शाह से मिलकर रिपोर्ट देंगे।

नतीजे पर सियासत भी गरम है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि RSS मुख्यालय और फडणवीस व गडकरी के शहर में कांग्रेस ने भाजपा को लगातार दूसरी बार हराया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस को जीरो कहने की जल्दबाजी का आरोप लगाया। विधान परिषद की पांच सीटों में तीन महाविकास आघाड़ी ने जीतीं और दो महायुति ने। भाजपा के कौस्तुभ गवाडे ने पुणे शिक्षक सीट जीती, शिंदे शिवसेना की किरण सरनाईक अमरावती शिक्षक सीट से जीतीं, हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे पदवीधर सीट और डॉ. प्रतापसिंह पाटील ने छत्रपति संभाजीनगर पदवीधर सीट जीती। रोहित पवार ने X पर फडणवीस के डिलीट हुए ट्वीट का जिक्र करते हुए तंज कसा और वंजारी को बधाई दी।

गिनती के दौरान माहौल कई बार गरमाया। आधी रात के आसपास भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता भिड़ने को हुए और नारेबाजी हुई। पुलिस ने दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को हटाया। कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने सुबह धरना भी दिया। वहीं एक नजारा अलग रहा, जब वंजारी गिनती केंद्र पहुंचे तो भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने उन्हें आवाज देकर गले लगाया।

#नागपुर#सियासत#PT24#Politics#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे