पदवीधर चुनाव के नतीजों पर वडेट्टीवार बोले, महायुती सरकार की विदाई के दिन शुरू
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विधान परिषद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में महाविकास अघाड़ी की जीत के बाद कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भाजपा और महायुति सरकार पर निशाना साधा।
नागपुर: विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में महाविकास अघाड़ी को मिली जीत के बाद कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भाजपा और महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका दावा है कि इस नतीजे से सत्ता के नशे में डूबी भाजपा की आंखें खुल जानी चाहिए। वडेट्टीवार के मुताबिक नौजवानों और किसानों के सवालों को लेकर जो नाराजगी है, वही इस चुनाव में दिखी। उन्होंने कहा, "महायुति सरकार की वापसी के दिन शुरू हो गए हैं। संघ की धरती से ही युवाओं ने भाजपा को गो बैक का नारा दे दिया।"
वडेट्टीवार ने बताया कि महाविकास अघाड़ी ने तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। उनका कहना था कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग ज्यादा हुई, वहां महाविकास अघाड़ी जीती और जहां वोटिंग कम रही, वहां महायुति को जीत मिली। उनके मुताबिक यह नतीजा जनता की नाराजगी और सत्ता के घमंड के खिलाफ लोगों की भावना का इजहार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों को ट्वीट डिलीट करने की नौबत आ गई।
महायुति के घटक दलों के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर वडेट्टीवार ने व्यंग्य में कहा कि वे बस इतना ही कह सकते हैं, "सुखी रहें"। उनका कहना था कि ये पार्टियां सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए साथ आई हैं और अब उनके बीच "तू-तू मैं-मैं" चल रही है।
स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए वडेट्टीवार ने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ रहा है और ग्राम पंचायतों में उनकी पार्टी की करीब 60 प्रतिशत सीटें कम हो गई हैं। आने वाले जिला परिषद चुनावों में भी ओबीसी समाज को नुकसान होने का डर उन्होंने जताया।
वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार ने पक्के तौर पर कहा था कि आरक्षण कम नहीं होगा, लेकिन इस मामले में अब तक कोई आखिरी हल नहीं निकला है और कई याचिकाएं पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव से एतराज नहीं है, मगर ओबीसी समाज को उसके हक का आरक्षण कोटा मिलना ही चाहिए। उनका कहना था कि अगर ओबीसी का प्रतिनिधित्व घटाकर चुनाव कराए जा रहे हैं, तो सरकार का रुख ओबीसी विरोधी है।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए वडेट्टीवार ने एक बार फिर सारे चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ईवीएम को लेकर जनता के मन में जो उलझन है, उसे दूर करने के लिए सरकार को बैलेट पेपर से वोटिंग कराने का फैसला लेना चाहिए। उनका दावा था कि ऐसा किया गया तो मोदी सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा।
भाजपा विधायक नितेश राणे के बयान पर वडेट्टीवार ने कहा कि उनकी राजनीतिक समझ कम है। उनके मुताबिक नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा भाजपा के खिलाफ हुई वोटिंग का असर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर नितेश कराळे न होते, तो अभिजीत वंजारी पहले ही दौर में चुनकर आ जाते।
वडेट्टीवार ने कहा कि अभिजीत वंजारी ने विधान परिषद में लगातार नौजवानों, बेरोजगारों और आम जनता के सवाल उठाए। इसीलिए मतदाताओं ने उनकी जरूरत पहचानी और उन्हें जिताया। उन्होंने कहा कि यह जीत धनशक्ति और सत्ता के घमंड के खिलाफ जनशक्ति का फैसला है।
वडेट्टीवार ने बताया कि देश में लोकतंत्र बचाने के लिए राहुल गांधी और इंडिया अघाड़ी ने लड़ाई छेड़ी है। उन्होंने भरोसा जताया कि एक तारीख को दिल्ली में होने वाले आंदोलन में बड़ी तादाद में लोग शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की मांग करते हुए इंडिया अघाड़ी महाभियोग की तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता के मुद्दे पर यह लड़ाई जारी रहेगी।
कुल मिलाकर वडेट्टीवार का दावा है कि विधान परिषद चुनाव का नतीजा महायुति सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का संकेत है। इसी आधार पर उन्होंने आने वाले स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव, ओबीसी आरक्षण और ईवीएम के मुद्दों पर सत्ताधारी दल को निशाने पर लिया।
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