नागपुर पदवीधर सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी जीते, भाजपा के सुधाकर कोहले हारे
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
विधान परिषद की पदवीधर सीट के नतीजे में वंजारी ने 3271 वोटों से बाजी मारी, कोहले ने बाद की गिनती तक हार नहीं मानी थी।
राज्य में हाल ही में विधान परिषद की 3 पदवीधर और 2 शिक्षक सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा नागपुर की पदवीधर सीट की रही। नागपुर को RSS का बालेकिल्ला कहा जाता है, इसलिए यहां के नतीजे पर पूरे देश की नजर थी।
इस सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को हरा दिया। भाजपा के लिए इसे बड़ी नाकामी बताया जा रहा है। अब नागपुर में भाजपा की हार की बड़ी वजह भी सामने आई है।
गिनती के दौरान रात में नितेश कराले के बैलेट पेपर के दूसरी पसंद वाले वोटों की गिनती शुरू हुई, तो पूरी तस्वीर बदल गई। अभिजीत वंजारी की बढ़त तेजी से बढ़ने लगी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल बन गया।
सुधाकर कोहले ने इस पर यकीन करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने साफ कहा, "कांग्रेस ने जश्न शुरू कर दिया है, लेकिन हमने हार नहीं मानी है। अभी 36वां बाद फेरी चल रहा है। इस फेरी तक मैं तीन हजार वोटों से आगे हूं। भाजपा के करीब नौ हजार वोट बाद (अमान्य) हो गए। इसी वजह से हम पीछे पड़े। भाजपा के जिन मतदाताओं ने मेरी पसंद के आगे '1' न लिखकर '2' लिखा, उनसे मेरी विनती है कि लोकतंत्र के लिए ऐसा वोट देना ठीक नहीं है। पूरी गिनती खत्म होने तक हम हार नहीं मानेंगे।"
नागपुर पदवीधर सीट का चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में खास अहमियत रखता है। यह इलाका RSS का बालेकिल्ला माना जाता है। ऐसी जगह किसी दूसरी पार्टी की जीत को बड़ा संकेत समझा जाता है।
इस सीट पर पदवीधर मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए यहां का चुनाव सिर्फ राजनीतिक पार्टियों की लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहता। पढ़े-लिखे तबके में उनकी स्वीकार्यता, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की निजी छवि की भी परीक्षा माना जाता है। वंजारी की जीत कांग्रेस के लिए कई मायनों में अहम है।
आंकड़ों की बात करें तो अभिजीत वंजारी को पहली और दूसरी पसंद के कुल 67 हजार 231 वोट मिले। भाजपा के कोहले को 63 हजार 960 वोट मिले। इस तरह वंजारी ने 3271 वोटों से जीत हासिल की। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे नितेश कराले को 25 हजार 908 वोट पड़े।
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