नागपुर ग्रेजुएट्स चुनाव: कराले गुरुजी के दूसरी पसंद वाले वोटों से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी जीते
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर संभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हरा दिया। निर्दलीय नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी के दूसरी पसंद के वोट फैसले में अहम रहे।
नागपुर, 28 अक्टूबर: नागपुर संभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में आखिरी दौर में पूरा नतीजा पलट गया। कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हरा दिया। इस मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले, जिन्हें लोग कराले गुरुजी के नाम से जानते हैं, के दूसरी पसंद के वोट फैसला करने वाले साबित हुए।
मतगणना में कई मोड़ आए। शुरुआत में बीजेपी पिछड़ रही थी, फिर कोहले ने करीब 4,000 वोटों की बढ़त बना ली। 30 उम्मीदवारों के वोटों की गिनती पूरी होने के बाद बताया गया कि उनकी बढ़त बढ़कर लगभग 5,000 वोट तक पहुंच गई थी।
लेकिन दूसरी पसंद के वोटों की गिनती के आखिरी दौर ने तस्वीर बदल दी। कोहले की बढ़त घटकर करीब 1,200 वोट रह गई, जबकि कराले से जुड़े लगभग 14,000 वोटों की गिनती अभी बाकी थी। बताया गया है कि कराले के दूसरी पसंद वाले वोटों का एक बड़ा हिस्सा वंजारी को गया। इससे कांग्रेस उम्मीदवार कोहले की बढ़त मिटाकर जीत तक पहुंच गए।
यह नतीजा बीजेपी के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह निर्वाचन क्षेत्र दशकों से पार्टी का पारंपरिक गढ़ रहा है। गंगाधरराव फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जैसे नेताओं का असर इस इलाके से लंबे समय से जुड़ा रहा है।
उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी के भीतर नाराज़गी पहले से थी। पिछले चुनाव में अनिल सोले को टिकट नहीं मिला था और उसके बाद बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार कार्यकर्ताओं की कथित नाराज़गी के बावजूद सुधाकर कोहले को उतारने के फैसले से पार्टी की आपसी एकजुटता पर फिर सवाल उठे।
बताया गया है कि अनिल सोले की खुली बगावत के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें मनाने उनके घर गए। मुख्यमंत्री दो दिन नागपुर में रहे और पार्टी का प्रचार मज़बूत करने के लिए शिक्षण संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।
बीजेपी को उम्मीद थी कि मतदान बढ़ने से कोहले पहली पसंद के वोटों के दम पर ही जीत जाएंगे। मगर गिनती के आखिरी दौरों ने यह उम्मीद पलट दी।
वंजारी की जीत से बीजेपी के भीतर उम्मीदवार चयन, संगठन की एकजुटता और अंदरूनी असंतोष को संभालने के तरीके पर बहस तेज़ होने की संभावना है। यह नतीजा यह भी दिखाता है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में दूसरी पसंद के वोट कितने मायने रखते हैं, जहां शुरुआती बढ़त जीत की गारंटी नहीं होती। आखिरी चरण में कराले का वोट आधार निर्णायक रहा और कड़े मुकाबले को नागपुर में बीजेपी के लिए बड़े राजनीतिक झटके में बदल दिया।
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