नागपुर स्नातक सीट पर कोहळे की हार, अवैध और खारिज वोटों के दावों पर उठे सवाल
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नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के सुधाकर कोहळे हार गए। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की।
नागपुर, 28 अक्टूबर: नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा के सुधाकर कोहळे हार गए हैं। कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बेहद करीबी मुकाबले में यह सीट जीती। नतीजे के बाद अवैध वोटों और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी के वोटों में दूसरी पसंद की गिनती ने इस चुनाव का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से मुकाबला आखिरी चरण में पलट गया।
चर्चा है कि 3,000 से अधिक वोट अवैध घोषित हुए हैं। साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है कि अलग-अलग कारणों से 15,000 से ज्यादा वोट खारिज हुए। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और अवैध वोटों के कारणों का पूरा ब्योरा भी सामने आना बाकी है।
एक दावे के मुताबिक, 3,000 से ज्यादा मतपत्रों में सुधाकर कोहळे के नाम के आगे दूसरी पसंद के तौर पर '2' लिखा गया था, लेकिन किसी भी उम्मीदवार को पहली पसंद के तौर पर '1' नहीं दिया गया। अगर इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है, तो सवाल उठेगा कि वोटरों को पसंद के हिसाब से वोट देने का तरीका कितनी अच्छी तरह समझाया गया था। सार्वजनिक सभाओं और सोशल मीडिया पर बार-बार अपील की गई थी। इसके बावजूद इतने मतपत्र अवैध होने का दावा गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
मतगणना के दौरान सुधाकर कोहळे ने करीब 5,000 वोटों की बढ़त बना ली थी। आखिरी चरण में जैसे ही दूसरी पसंद के वोटों की गिनती शुरू हुई, उनकी बढ़त घटने लगी। उस वक्त नितेश कराले से जुड़े करीब 14,000 वोटों की गिनती बाकी बताई गई थी। इन वोटों में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को दूसरी पसंद मिलने के बाद मुकाबले का रुख बदल गया और वंजारी जीत गए।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। इस बार सुधाकर कोहळे की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चा थी। पूर्व विधायक और परिषद सदस्य अनिल सोले की नाराजगी रही और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी दखल दिया। फिर भी भाजपा यह सीट नहीं बचा सकी।
अब सवाल उठ रहे हैं कि हार के पीछे दूसरी पसंद के वोटों का समीकरण था, उम्मीदवार चुनने को लेकर असंतोष था, या चुनाव के इंतजाम में कोई बड़ी चूक हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 3,000 से अधिक अवैध वोटों और 15,000 से ज्यादा खारिज वोटों के दावों की सच्चाई क्या है, और अगर इन आंकड़ों की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
इन सवालों के जवाब आधिकारिक मतगणना रिकॉर्ड और चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही मिल सकते हैं।
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