विधान परिषद नतीजों के बाद महायुति में खटपट, नितेश राणे बोले: क्या कोई मातोश्री प्रेमी है?
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विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद महायुति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा मंत्री नितेश राणे ने पत्रकार परिषद में शिंदे गुट के नेताओं और संजय राउत पर टिप्पणी की।
विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए चुनाव में भाजपा को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। शिवसेना शिंदे गुट को एक सीट मिली, राष्ट्रवादी शरद पवार गुट को दो सीटें मिलीं और कांग्रेस ने भी एक सीट जीती। इन नतीजों के बाद महायुति के भीतर भाजपा और शिंदे गुट के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।
इसी माहौल में भाजपा मंत्री नितेश राणे ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को पत्रकार परिषद बुलाई और चुनाव नतीजों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "महायुति में कहीं उद्धव ठाकरे के मातोश्री प्रेमी तो नहीं रह गए?" इस बयान से महायुति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
स्नातक और शिक्षक क्षेत्रों के इस चुनाव में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली, ऐसी चर्चा चल रही है। पांच में से भाजपा के हिस्से में सिर्फ एक सीट आई। इसके बाद भाजपा की हार को लेकर राजनीतिक आरोप शुरू हो गए। शिंदे गुट के नेता रविंद्र धंगेकर ने भाजपा के उम्मीदवार पर टीका की। उन्हें जवाब देते हुए नितेश राणे ने महायुति के कुछ नेताओं की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए।
पत्रकार परिषद में राणे ने कहा कि शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सुनेत्रा पवार समेत वरिष्ठ नेता एक साथ बैठकर इन घटनाओं पर चर्चा करेंगे। उनके मुताबिक जहां जरूरी होगा, वहां उचित कदम उठाए जाएंगे।
राणे ने यह शंका भी जताई कि क्या महायुति में रहकर उद्धव ठाकरे के पक्ष में काम करने वाले कुछ लोग हैं। उन्होंने "शकुनीमामा" शब्द का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर आग लगाने का काम कर रहे हैं। उनके इस बयान से महायुति की अंदरूनी राजनीति पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।
नितेश राणे ने शिवसेना ठाकरे गुट के नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा। उन्होंने चुनौती दी कि दूसरों की पार्टी की बातों पर बोलने से पहले राउत यह बताएं कि उनकी अपनी पार्टी के तीन उम्मीदवारों को कितने वोट मिले। कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी राणे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत पर जश्न मनाने की नौबत आ गई है।
नतीजों के बाद सहयोगी दलों के बीच शुरू हुई इस जुबानी जंग पर सबकी नजर है कि आगे क्या मोड़ आता है। यह देखना अहम होगा कि वरिष्ठ नेता साथ बैठकर विवाद सुलझा लेते हैं या आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ते हैं।
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