गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, भाजपा के सुधाकर कोहले हारे

नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, भाजपा के सुधाकर कोहले हारे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने बुधवार रात जीत की बढ़त बना ली। भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को हार का सामना करना पड़ा। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय का शहर है। भाजपा देश में पिछले 12 साल से और महाराष्ट्र में 10 साल से सत्ता में है। ऐसे में उसके लिए बुधवार का दिन भारी रहा।

कोहले की हार का असर सिर्फ नागपुर या महाराष्ट्र भाजपा तक नहीं रहेगा। यह पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को भी काफी दिनों तक खटकती रहेगी।

इस हार को कांग्रेस के शून्य वाले किस्से से जोड़कर भी देखा जा रहा है। 23 अक्टूबर को 4 राज्यों की 29 विधान परिषद सीटों पर वोट पड़े थे। नतीजे मंगलवार से आने शुरू हुए और बुधवार रात तक ज्यादातर सीटों के नतीजे आ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन नतीजों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया। उन्होंने ट्वीट किया कि चुनाव बैलेट पर हुए, तो कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं। यह ट्वीट खूब वायरल हुआ और कांग्रेस के शून्य की बात दूर तक पहुंची। कांग्रेस के नेता भी इस शून्य से आहत थे। बुधवार रात जैसे ही खबर आई कि नागपुर में वंजारी ने जीत की बढ़त बना ली है, पार्टी के जीरो वाले दाग की बात खत्म हो गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कांग्रेस को जीरो साबित करने की बहुत जल्दी थी। उनके मुताबिक जिस शहर में आरएसएस के अलावा नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस जैसे बड़े नेता आते हैं, वहां भाजपा की यह हालत बताती है कि जनता ने धन बल और सत्ता के अहंकार को तोड़ दिया। सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र में स्नातक की 3 सीटें महाविकास आघाडी ने जीती हैं और यह युवाओं में बदलाव की झलक है। उन्होंने यह भी कहा कि नागपुर के अलावा मोदी अपने बनारस की सीट भी नहीं बचा सके। बिहार में पटना सिटी में भी भाजपा बुरी तरह हारी और योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में हारते-हारते बची। सपकाल का कहना था कि मोदी को अपने ट्वीट में यह सब भी लिखना चाहिए था।

वंजारी की जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश है। भाजपा खेमे में मायूसी है। आम कार्यकर्ता इसे तथाकथित चाणक्यों की नाकामी बता रहे हैं। उनका मानना है कि विधानसभा चुनाव के वक्त भी, जब पार्टी की लहर थी, शहर की 2 सीटों पर हार मिली थी। इनमें से एक पश्चिम नागपुर थी, जहां कोहले ही उम्मीदवार थे और विधायक विकास ठाकरे के सामने हारे थे। तभी से कहा जा रहा था कि विधान परिषद चुनाव में पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है।

कोहले का नाम घोषित होते ही पूर्व महापौर अनिल सोले ने खुली बगावत कर दी थी। पार्टी जानती थी कि इसका भारी नुकसान हो सकता है। इसीलिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घर जाकर सोले को समझाया। सोले मान गए, लेकिन कैडर बहुत खुश नहीं था। बुधवार को पार्टी की हार के बाद एक कार्यकर्ता ने ऑफ द रिकॉर्ड कहा कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती।

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