नागपुर स्नातक चुनाव में गड़बड़ी का आरोप, हाई कोर्ट ने आयोग से 30 अक्टूबर तक मांगा हलफनामा
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नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप वाली याचिका में हाई कोर्ट ने संशोधन आवेदन स्वीकार कर प्रतिवादियों से 30 अक्टूबर तक हलफनामा मांगा है।
नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला हाई कोर्ट पहुंचा है। इस मामले में याचिकाकर्ता प्रा. सचिन कालबांडे ने अब संशोधन आवेदन दायर किया है। कोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया है।
न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके ने संशोधन आवेदन स्वीकार करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त, राज्य चुनाव आयोग और विभागीय आयुक्त समेत सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे 30 अक्टूबर तक हलफनामा पेश करें।
मामले की सुनवाई मंगलवार को हुई। इससे पहले हाई कोर्ट ने यह मामला मुख्य पीठ यानी मुंबई को भेज दिया था, लेकिन मुख्य पीठ ने आदेश दिया कि नागपुर पीठ ही इस पर सुनवाई करे। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से अधिवक्ता नीरजा चौबे ने पैरवी की।
याचिका में मतदाता सूची को लेकर कई गंभीर गड़बड़ियों का दावा किया गया है। याचिका के मुताबिक नामांकन पत्र जमा करने की आखिरी तारीख तक नागपुर संभाग में 98,782 आवेदन लंबित पड़े थे। इसके अलावा मतदाता सूची में करीब 8,400 मतदाताओं के नाम दो बार दर्ज होने की बात भी कही गई है।
याचिकाकर्ता ने एक और आरोप लगाया है। उनके मुताबिक नियमों और मान्यता के बिना भी 'डिप्लोमा' और 'डी फार्मा' धारकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिए गए।
याचिका में प्रशासन के विरोधाभासी बयानों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। एक तरफ सरकारी वकील ने दावा किया कि अंतिम मतदाता सूची दिसंबर 2025 में ही प्रकाशित हो चुकी है। दूसरी तरफ चुनाव अधिकारी ने 10 अक्टूबर को बताया था कि सूची का काम अभी चल रहा है और यह कब प्रकाशित होगी, इस बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन, आवेदनों की जांच और पूरी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता ने इस चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर हाई कोर्ट से उचित न्याय नहीं मिला तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
अब सबकी नजर 30 अक्टूबर पर है, जब तक चुनाव आयोग और बाकी प्रतिवादियों को अपना हलफनामा कोर्ट में पेश करना है।
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