नागपुर पदवीधर सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, भाजपा के सुधाकर कोहळे हारे
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विधान परिषद के चुनाव में नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को बड़े अंतर से हराया।
विधान परिषद के चुनाव में आखिरकार कांग्रेस का खाता खुल गया है। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को बड़े अंतर से हराया।
इस जीत को कांग्रेस के लिए अहम राजनीतिक कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं भाजपा के लिए यह नतीजा नागपुर और विदर्भ में अपनी राजनीतिक स्थिति परखने का संकेत माना जा सकता है। अभिजीत वंजारी की यह लगातार दूसरी जीत है। 2020 में भी वे नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीते थे। पेशे से वकील वंजारी ने अपनी शुरुआत छात्र राजनीति से की थी।
राजनीति अभिजीत वंजारी को विरासत में मिली है। वे नागपुर के एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए अभिजीत ने भी राजनीति का रास्ता चुना।
उन्होंने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से बीए और कानून की डिग्री यानी एलएलबी पूरी की है। वे नागपुर विश्वविद्यालय की सिनेट और प्रबंधन परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं।
राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने छात्र राजनीति से की। 1998 से 2002 तक वे महाराष्ट्र प्रदेश NSUI के महामंत्री थे। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के सचिव की जिम्मेदारी मिली। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में वे कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर भी काम कर चुके हैं। नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी में उन्होंने महामंत्री और प्रवक्ता की भूमिका भी निभाई। महाराष्ट्र की राजनीति में वंजारी कांग्रेस के लंबे समय से उम्मीदवार के रूप में दिखते आए हैं।
उनका जन्म 10 मई 1973 को नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ। उनके पिता, स्वर्गीय गोविंदराव मारोतराव वंजारी, कांग्रेस के नेता थे। दिसंबर 2020 में उन्होंने पहली बार नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव जीता था, और अक्टूबर 2026 में यह उनकी दूसरी जीत है।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में खास अहमियत रखता है। यह इलाका आरएसएस का गढ़ माना जाता है। ऐसी जगह किसी दूसरे दल की जीत बड़ा संकेत होती है। इस निर्वाचन क्षेत्र में स्नातक मतदाता अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए यहां का चुनाव सिर्फ पार्टियों की लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहता। पढ़े-लिखे तबके में उनकी स्वीकार्यता, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की निजी छवि की भी परीक्षा माना जाता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे में भाजपा के उम्मीदवार को हराकर विधान परिषद की सीट जीतना कांग्रेस के लिए अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने का मौका है।
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