पुरंदर उपसा योजना का पानी मुफ्त देने की मांग, शिवतारे ने फडणवीस को लिखा पत्र
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पुरंदर के विधायक विजय शिवतारे ने सूखे के हालात में किसानों को योजना का पानी बिना पानी बिल और बिजली बिल के देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री को पत्र भेजा है।
सासवड: पुरंदर में सूखे जैसे हालात को देखते हुए पुरंदर उपसा योजना का पानी किसानों को मुफ्त मिलना चाहिए। पुरंदर के विधायक विजय शिवतारे ने यह मांग पुरजोर तरीके से रखी है। उनका कहना है कि किसानों से न पानी का शुल्क लिया जाए और न बिजली बिल। इस बारे में शिवतारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील को पत्र भेजकर जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की है।
पत्र में बताया गया है कि पुणे शहर में इस्तेमाल के बाद नदी में छोड़ा जाने वाला साढ़े चार टीएमसी पानी पुरंदर उपसा सिंचाई योजना के जरिए पुरंदर के किसानों को दिया जाता है। इसी पानी से इलाके के किसान सब्जियां, फल और फूल उगाते हैं। यह उपज पुणे शहर और आसपास के इलाकों की रोज की जरूरतें पूरी करने में अहम है। पत्र के मुताबिक मौजूदा हालात में किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए यह योजना पूरी तरह मुफ्त चलाना जरूरी है। इसमें कहा गया है कि अगर सरकार इसके खर्च का इंतजाम करके पानी उपलब्ध कराए, तो सूखे से जूझ रहे किसानों को राहत मिलेगी।
इस बीच विधायक शिवतारे ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ पुरंदर उपसा योजना समेत कई मुद्दों पर अहम बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र कृष्णा घाटी विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक संजीव चोपडे, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रवीण कोळे, कार्यकारी अभियंता अमरजित बिराजदार और उप कार्यकारी अभियंता ज्योती घुगे मौजूद थे। किसान भी बैठक में शामिल हुए। शिवतारे ने संबंधित अधिकारियों को किसानों में पानी का बंटवारा न्यायपूर्ण तरीके से करने के निर्देश दिए।
शिवतारे ने कहा कि कमी के इस दौर में किसान फसल बचाने के लिए पुरंदर उपसा के पानी के पीछे भागदौड़ कर रहे हैं। उनके मुताबिक योजना के अधिकारी मनमाने ढंग से किसानों से ज्यादा पैसे ले रहे हैं और इसकी कई शिकायतें उनके पास आई हैं। इसलिए जिन अधिकारियों ने ज्यादा पैसे लिए हों, उनकी जांच होनी चाहिए, यह मांग उन्होंने जोर देकर रखी।
शिवतारे का कहना है कि पुरंदर उपसा योजना का पानी किसानों का हक है और किसी भी किसान को ज्यादा पैसे भरने की जरूरत नहीं है। पिछले साल 19 फीसदी पानी का शुल्क था, इस साल भी उसी दर से पानी का शुल्क भरना है। उन्होंने अपील की कि पैसे नकद न दिए जाएं। तालुका स्तर पर और पंप हाउस में क्यूआर कोड लगाए गए हैं, उन पर ऑनलाइन भुगतान किया जाए।
शिवतारे को यह भी शिकायतें मिली हैं कि योजना के कई अधिकारी कुछ किसानों से पैसे लेने के बाद भी समय पर पानी नहीं देते और तय लोगों को अपनी सुविधा से पानी देते हैं। उन्होंने योजना के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कमी के समय कोई राजनीति या मनमानी न हो और सबके साथ बराबर न्याय किया जाए। पानी बंटवारे में भेदभाव न हो और सब कुछ पारदर्शी रहे, इसके लिए योजना के दफ्तर में डैशबोर्ड लगाने की व्यवस्था की गई है। डैशबोर्ड पर यह जानकारी दी जाएगी कि किस किसान ने कब पैसे भरे, आज किस इलाके में पानी छोड़ा जाएगा, दूसरे इलाके में कब छोड़ा जाएगा, कितने घंटे और कितना पानी मिलेगा। शिवतारे के अनुसार इससे बंटवारे में होने वाली गड़बड़ी कम होगी और पानी पारदर्शी तरीके से बंटेगा।
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