नागपुर पदवीधर चुनाव में बीजेपी को अपने ही गढ़ में झटका, संघ और मुख्यमंत्री के इलाके में हार की ये हैं वजहें
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नागपुर पदवीधर चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहळे को हराया, बीजेपी को अपने गढ़ में बड़ा झटका।
राज्य विधानसभा के शिक्षक और पदवीधर चुनाव में बीजेपी को अपने ही गढ़ में बड़ा झटका लगा है। नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने बीजेपी उम्मीदवार सुधाकर कोहळे को हरा दिया। इस जीत से कांग्रेस के लिए नागपुर में नए दरवाजे खुल गए हैं।
सुधाकर कोहळे को जिताने के लिए बीजेपी ने हर तरह की रणनीति बनाई थी, बारीकी से प्लानिंग की थी और जोरदार प्रचार भी किया था। इसके बावजूद असल में वोटों का गणित बैठाने में पार्टी कामयाब नहीं हो पाई, और नतीजा उसके हक में नहीं गया।
राज्य की उपराजधानी नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी का दबदबा सबको मालूम है। नागपुर पदवीधर चुनाव में कोहळे के लिए बीजेपी ने बड़ी फील्डिंग लगाई थी। राज्य के बड़े नेताओं ने उनके लिए बड़ी प्रचार सभाएं भी लीं।
खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे और मुख्यमंत्री की तरफ से भी कोहळे के लिए बड़ी फौज तैयार की गई थी। लेकिन हार के बाद चर्चा चल रही है कि पार्टी के अपने पक्के वोटों में ही बंटवारा हो गया।
अब यह अंदाजा भी लगाया जा रहा है कि बीजेपी की यह सोच कि कुछ तय वोट तो हमारे ही हैं, मतदाताओं को गृहीत मान लेना और पदवीधरों की असली समस्याओं और परेशानियों को अनदेखा करना, ये वजहें पार्टी की हार का कारण बनीं।
नागपुर के राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि केंद्रीय मंत्री समेत राज्य के बड़े नेताओं को बीजेपी ने प्रचार में उतारा था, लेकिन मैदान में यानी ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को भी अति आत्मविश्वास ले डूबा।
इसके अलावा संघ के कार्यकर्ता और बीजेपी की बड़ी मशीनरी काम कर रही थी, फिर भी पार्टी को जीत नहीं मिल सकी। जीत का जरूरत से ज्यादा भरोसा और विरोधी उम्मीदवारों की ताकत को नजरअंदाज करना, इन बातों का बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
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