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नागपुर स्नातक सीट: कराले की दूसरी पसंद ने पलटा खेल, कांग्रेस के वंजारी जीते, कोहले हारे

नागपुर स्नातक सीट: कराले की दूसरी पसंद ने पलटा खेल, कांग्रेस के वंजारी जीते, कोहले हारे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराया। नतीजे के बाद हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर निशाना साधा।

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस के हाथ में ही रही। करीब 30 घंटे से ज्यादा चली गिनती के बाद कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हरा दिया। बुधवार रात नतीजा साफ हुआ। आखिरी दौर तक कोहले आगे चल रहे थे, मगर दूसरी पसंद के वोटों ने पूरा हिसाब पलट दिया।

गिनती मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह 8 बजे मानकापुर के डिवीजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई। हॉल में 84 टेबल लगाई गई थीं। सबसे पहले मतपेटियों से मतपत्र निकालकर 25-25 के गट्ठे बनाए गए। असली गिनती दोपहर करीब 2 बजे शुरू हो पाई। इस सीट पर 2,55,603 मतदाता पंजीकृत थे और 1,65,672 ने वोट डाला। जिलेवार मतदान चंद्रपुर में 73.05%, गढ़चिरौली में 72.95%, गोंदिया में 71.29%, वर्धा में 68.35%, भंडारा में 67.07% और नागपुर में सबसे कम 60.35% रहा। कुल 445 मतदान केंद्रों की 788 मतपेटियों से 1,65,705 मतपत्र निकले। इनमें 204 वैध पोस्टल वोट जोड़कर 1,65,909 वोटों की गिनती करनी थी। मैदान में 38 उम्मीदवार थे, इसलिए हर उम्मीदवार के लिए एक और संदिग्ध मतपत्रों के लिए एक, यानी कुल 39 डिब्बे रखे गए। हर टेबल पर करीब 1,000 मतपत्र संभालने का अनुमान था।

पोस्टल वोट सबसे पहले गिने गए। कुल 238 में से 34 अवैध निकले। बाकी 204 वैध वोटों में वंजारी को 101, कोहले को 86 और बाकी उम्मीदवारों को 17 वोट मिले। यानी पोस्टल में वंजारी 15 वोट से आगे रहे। पोस्टल में ही इतने वोट अवैध निकलने से यह अंदेशा पहले ही जताया जा रहा था कि आम मतपत्रों में भी अवैध वोट ज्यादा हो सकते हैं। आधी गिनती के वक्त वंजारी के सात से आठ हजार वोट आगे होने की बात कही जा रही थी, पर वह अंदाजा ही था, आधिकारिक आंकड़ा नहीं। दोनों मुख्य उम्मीदवारों ने गिनती केंद्र पर अपनी जीत का पूरा भरोसा जताया था।

पहले राउंड में 84,003 मतपत्र गिने गए और यह गिनती रात करीब 8 बजे खत्म हुई। इनमें से 76,875 वैध और 7,128 अवैध निकले। आधिकारिक शीट के मुताबिक वंजारी को 28,998 वोट मिले और कोहले को 28,071, यानी वंजारी 927 वोट आगे थे। निर्दलीय नितेश कराले को 14,708 वोट मिले। उनके बाद संजय थुल को 1,762, मंगेश वानखेडे को 642, धनंजय बोरकर को 612, अतुल देशमुख को 576 और सुमेध गडपायले को 521 वोट मिले। गिनती के दौरान सोशल मीडिया पर कभी कोहले के छह हजार से आगे होने की खबर चली, तो कभी वंजारी के सात हजार से आगे होने की। प्रशासन ने तब कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की थी।

रात करीब 9.30 बजे बाकी 81,909 वोटों की गिनती शुरू हुई जो बुधवार तड़के तक चली। इस दूसरे राउंड में कोहले को 32,853, वंजारी को 27,632 और कराले को 9,541 वोट मिले। दोनों राउंड मिलाकर कोहले के 60,924, वंजारी के 56,630 और कराले के 24,249 वोट हुए। थुल के 3,091, गडपायले के 1,096, वानखेडे के 1,029, देशमुख के 921 और बोरकर के 849 वोट रहे। इस मोड़ पर कुल वैध वोट 1,50,874 थे, अवैध 15,032 और कुल वोट 1,65,906। चुनाव आयोग के हिसाब से जीत का कोटा 75,438 वोट बना, यानी वैध वोटों का आधा और उसमें एक और। कोहले को कोटे के लिए 14,514 और वंजारी को 18,808 वोट चाहिए थे। किसी का कोटा पूरा नहीं हुआ, इसलिए उम्मीदवारों को बाहर करने और दूसरी पसंद के वोट गिनने का सिलसिला शुरू हुआ। शुरुआती गिनती में कोहले को 56, वंजारी को 63 और कराले को 48 दूसरी पसंद के वोट मिले।

बाहर होने वाले उम्मीदवारों के आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टों में अलग हैं। किसी में 21 उम्मीदवारों के बाहर होने की बात है, किसी में 28 की और किसी में 30 उम्मीदवारों की गिनती पूरी होने की। 28 उम्मीदवार बाहर होने के बाद कोहले 61,029 और वंजारी 56,785 वोट पर थे, यानी कोहले 4,244 वोट आगे। बढ़त पर भी रिपोर्टें एकमत नहीं हैं। किसी में यह चार हजार सात सौ बताई गई, तो किसी में लगभग पांच हजार, जो 30 उम्मीदवारों की गिनती के बाद की स्थिति थी। फिर अंतिम तीन उम्मीदवारों के वोटों की दूसरी पसंद गिनी जाने लगी तो कोहले की बढ़त घटकर करीब 1,200 वोट रह गई। उस वक्त कराले के लगभग 14,000 वोटों की गिनती बाकी थी। इन वोटों की दूसरी पसंद का बड़ा हिस्सा वंजारी को गया, बढ़त मिट गई और वंजारी जीत गए। खबर है कि कोहले ने हार मान ली है।

इसी गिनती में अनिल सोले के वोटों की भी चर्चा रही। भाजपा ने कोहले को उम्मीदवार बनाया तो पूर्व विधायक सोले ने बगावत कर दी थी। 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद उनके घर गए और उन्हें मनाया। उन्होंने मैदान से हटने और कोहले का साथ देने की घोषणा की, पर नाम वापसी की आखिरी तारीख को नामांकन औपचारिक रूप से वापस नहीं लिया था। इसलिए मतपत्र पर उनका नाम बना रहा। फिर भी कुछ मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया। पहले राउंड में उन्हें 99 वोट बताए गए थे। बाद में उन्हें पहली पसंद के 267 और पोस्टल के 7, यानी कुल 274 वोट मिले। इन 274 वोटों में दूसरी पसंद कोहले को 88, वंजारी को 41 और कराले को 10 वोट मिली।

कराले का प्रदर्शन इस पूरे चुनाव की सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात रहा। शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के इस बागी उम्मीदवार को लोग कराले गुरुजी के नाम से भी जानते हैं। उन्होंने गिनती से पहले दावा किया था कि पहले ही राउंड में उन्हें 40 से 45 हजार वोट मिलेंगे। भाजपा के शुरुआती सर्वे में उनके लिए करीब 15 हजार वोट का अंदाजा था। आखिर में उन्हें पहली पसंद के 24,249 वोट मिले। चर्चा है कि भाजपा नेताओं ने उन्हें महाविकास अघाड़ी के वोट काटने के लिए उतारा था, पर दूसरी पसंद ने उलटा असर किया। कराले ने एक मतपेटी से 8 मतपत्र ज्यादा निकलने का दावा किया, चुनाव आयोग के प्रति नाराजगी जताई और कम से कम मतपत्रों वाले चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा की मांग की। गिनती के दौरान कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताकर धरना भी दिया।

गिनती के बीच माहौल कई बार गरमाया। कोहले ने कई वोट गलत तरीके से अवैध ठहराए जाने का आरोप लगाया, ऐसे वोटों की दोबारा जांच की मांग की और कहा कि नतीजा गलत तरीके से आया तो वे कोर्ट जाएंगे। उनका कहना था कि इस चुनाव में कराले गुरुजी ने उम्मीद से ज्यादा वोट लिए। आधी रात के करीब भाजपा और कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। चश्मदीदों के मुताबिक किसी ने राहुल गांधी के बारे में अपशब्द कहे, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वोट-चोरी के नारे लगाए। मारपीट की नौबत आने से पहले पुलिस ने दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को अलग कर दिया। एक नजारा अलग भी दिखा। वंजारी गिनती केंद्र पर पहुंचे तो भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने उन्हें आवाज दी और दोनों गले मिले। नतीजे से पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न और नारेबाजी शुरू की तो भारी पुलिस बल तैनात किया गया और दोनों पक्षों से संयम की अपील की गई।

जीत के बाद सवाल अवैध वोटों पर भी उठे। चर्चा है कि 3,000 से ज्यादा वोट अवैध घोषित हुए और 15,000 से ज्यादा खारिज हुए। एक दावे के मुताबिक 3,000 से ज्यादा मतपत्रों में कोहले के नाम के आगे दूसरी पसंद के तौर पर 2 लिखा गया था, पर किसी को पहली पसंद का 1 नहीं दिया गया था। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और अवैध वोटों के कारणों का पूरा ब्योरा आना बाकी है। दूसरे राउंड के बाद का आधिकारिक आंकड़ा 15,032 खारिज वोटों का था।

यह सीट भाजपा का पुराना गढ़ मानी जाती रही है और गंगाधरराव फडणवीस तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जैसे नेताओं का असर यहां लंबे समय से रहा है। 2020 में 1978 के बाद पहली बार, यानी 42 साल बाद, वंजारी ने यह सीट कांग्रेस के नाम की थी। तब उन्होंने भाजपा के संदीप जोशी को 61,701 के मुकाबले 42,791 वोट से, लगभग 18,900 वोट के अंतर से हराया था। इस बार भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाया। पिछली बार अनिल सोले को टिकट नहीं मिला था और पार्टी हारी थी। इस बार कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बावजूद कोहले को उतारा गया। फडणवीस दो दिन नागपुर में रुके और शिक्षण संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों से मिले। आखिरी दौर में फडणवीस, गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले तीनों प्रचार में उतरे थे। बढ़ा हुआ मतदान देखकर भाजपा को उम्मीद थी कि पहली पसंद के वोट से ही बात बन जाएगी। अब पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन और असंतोष को लेकर बहस तेज होने के आसार हैं।

नतीजे के बाद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस का मुख्यालय, मुख्यमंत्री फडणवीस और गडकरी का शहर होने के बावजूद कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को हराया है। उनके मुताबिक विधान परिषद की पांच सीटों में से महाविकास अघाड़ी ने तीन जीतकर महायुति को बुरी तरह हराया। सपकाल का कहना था कि भाजपा के पास सत्ता, पैसा और सारी ताकत थी, फिर भी हार गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा कि नतीजे से पहले ही उन्होंने कांग्रेस को जीरो कहा था। सपकाल के शब्दों में, "आखिर भ्रम का गुब्बारा फूट गया"। कांग्रेस ने इस जीत से पांच सीटों के चुनाव में अपना खाता खोल लिया।

यह मुकाबला सिर्फ नागपुर का नहीं था। तीन स्नातक (पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर) और दो शिक्षक (अमरावती, पुणे) सीटों पर कुल 182 उम्मीदवार थे। गिनती के दौरान पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावंडे आगे थे। अमरावती शिक्षक सीट पर 23 घंटे की गिनती के बाद 19वें राउंड में शिवसेना के किरण सरनाईक 8,348 वोट के साथ 3,535 से आगे थे। बागी श्रीकांत देशपांडे 4,813 और कांग्रेस की आदिती पोहरे 4,786 वोट पर थीं। मराठवाड़ा स्नातक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के प्रतापसिंह पाटील आगे और अजित पवार गुट के सतीश चव्हाण पीछे चल रहे थे। नागपुर में आखिर में वही हुआ जो कराले के वोटों ने तय किया: पहली बढ़त जीत की गारंटी नहीं होती, और दूसरी पसंद के वोट पूरा नतीजा बदल सकते हैं।

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