गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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नागपुर स्नातक चुनाव: दो के गोले से कोहले के करीब 9,500 वोट अमान्य

नागपुर स्नातक चुनाव: दो के गोले से कोहले के करीब 9,500 वोट अमान्य तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

नागपुर स्नातक सीट पर 16 हजार से ज्यादा वोट अवैध घोषित हुए, जिनमें सुधाकर कोहले के नाम के आगे बने 2 के गोले वाले करीब 9,500 मतपत्र शामिल हैं।

नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में वोटों की गिनती के बाद जो आंकड़े आए हैं, उनसे हर कोई हैरान है। इस सीट पर 16 हजार से ज्यादा वोट अवैध घोषित हुए हैं। राजनीतिक जानकार हों या आम लोग, सब पूछ रहे हैं कि पढ़े-लिखे वोटरों वाले इलाके में इतने वोट कैसे बेकार चले गए।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 2 के गोले की है। बताया जा रहा है कि कई मतपत्रों पर भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के नाम के आगे प्राथमिकता क्रम 2 लिखा गया और उसके चारों तरफ गोला बना दिया गया। चुनाव नियमों के हिसाब से इस तरह गोला बनाकर लिखे गए प्राथमिकता क्रम वाले मतपत्र अमान्य माने जाते हैं, इसलिए उन्हें अवैध घोषित कर दिया गया।

कोहले ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। लेकिन ऐसे मतपत्रों पर फैसला चुनाव नियमों के तहत ही हुआ। इसी एक तरीके की वजह से कोहले के नाम के आगे दर्ज करीब 9,500 मतपत्र अवैध हो गए। कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के नाम के आगे भी कुछ मतपत्र निकले, जिन पर 5 का प्राथमिकता क्रम गोले के अंदर लिखा था।

राजनीतिक गलियारों में खूब कहा जा रहा है कि मतपत्र पर 2 लिखकर गोला बनाने का यह तरीका भाजपा पर ही भारी पड़ गया। शुरू में भरोसा था कि भाजपा उम्मीदवार सिर्फ पहली पसंद के वोटों से ही जीत जाएंगे। अब सवाल उठ रहा है कि 2 लिखकर उसके चारों तरफ गोला बनाने का यह अजीब तरीका आखिर कहां से आया और इसे किसने फैलाया।

कहा जा रहा है कि इस तरीके ने भाजपा के वोटों का गणित बिगाड़ दिया और अनजाने में कांग्रेस के काम आ गया। इसी वजह से गलियारों में यह जुमला चल पड़ा है: 2 का गोला, कांग्रेस के लिए बना हाजमोला। हालांकि इन चर्चाओं और दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नागपुर के इस चुनाव में विवाद सिर्फ 2 के गोले का नहीं है। देशभर में मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रही हलचल के बीच नागपुर में करीब 8,400 कथित दोहरे मतदाताओं का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। ऊपर से स्नातकों की इस सीट पर 16,000 से ज्यादा वोटों का अवैध होना बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है। जहां वोटर पढ़े-लिखे और जागरूक माने जाते हैं, वहां इतने वोट खारिज होने से पूरी मतदान प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। माना जा रहा है कि अवैध वोटों की इस भारी संख्या का सबसे बड़ा नुकसान सुधाकर कोहले को ही उठाना पड़ा।

इसके साथ भाजपा के भीतर का घमासान भी सामने आ गया। उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया को लेकर पार्टी के एक खास गुट में गहरी नाराजगी थी। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच यह सवाल घूम रहा है कि एक ही नेता को बार-बार मौका क्यों दिया जाता है। प्रो. सोले की उम्मीदवारी को लेकर भी पार्टी के अंदर यह नाराजगी खुलकर दिखी।

कुल मिलाकर 16 हजार से ज्यादा अवैध वोट, करीब 9,500 वोटों को ले डूबने वाला 2 का गोला और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी, इन तीनों ने मिलकर भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले का चुनावी गणित पूरी तरह बिगाड़ दिया।

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