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पुणे में MLC मतगणना के दौरान हंगामा, आठ मतपेटियों पर सील नहीं और एक पेटी से धमकी भरी पर्ची निकली

पुणे विभाग शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना बालेवाडी में शुरू होते ही आठ मतपेटियों पर सील न होने से विवाद हुआ, और एक पेटी से पुरानी पेंशन की मांग वाली चेतावनी भरी पर्ची निकली।

महाराष्ट्र विधान परिषद के पुणे विभाग शिक्षक और स्नातक (ग्रेजुएट) निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना बालेवाडी के श्री शिवछत्रपति क्रीड़ा संकुल में शुरू हुई। शुरुआती दो घंटों में ही यहां बड़ी हलचल और राजनीतिक विवाद देखने को मिला। कई मतपेटियों की सील टूटी मिली, और एक बैलेट बॉक्स से सीधे चेतावनी देने वाली पर्ची निकलने से काफी गड़बड़ मच गई।

मतगणना शुरू होते ही बालेवाडी स्टेडियम के गणना केंद्र पर अफरातफरी हो गई। महाविकास आघाडी के मतगणना प्रतिनिधियों ने देखा कि कुल आठ मतपेटियों (बैलेट बॉक्स) पर सील नहीं थी या उनके सुरक्षा तार टूटे हुए थे। महाविकास आघाडी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख (राष्ट्रवादी कांग्रेस, शरदचंद्र पवार पार्टी) और उनके प्रतिनिधियों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की और मतगणना रोकने की मांग की। इस मुद्दे पर निर्वाचन निर्णय अधिकारी और महाविकास आघाडी के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार कहासुनी हुई, जिसकी वजह से कुछ देर के लिए मतगणना रोकनी पड़ी।

दूसरी तरफ, पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की गिनती के दौरान टेबल नंबर 2 पर एक चौंकाने वाली बात सामने आई। एक मतपेटी से मतपत्रों के साथ हाथ से लिखी एक पर्ची भी निकली। उस पर लिखा था, "हमें कोई खरीद नहीं सकता। सन 2004 से पहले की पुरानी पेंशन लागू करो, नहीं तो देख लो..."। यह पेटी पुरंदर तालुका के राजेवाडी मतदान केंद्र की थी, और साफ हुआ कि एक शिक्षक ने वोट डालने के साथ यह चेतावनी वाली पर्ची भी डाल दी थी। किरण गोफणे ने यह बात निर्वाचन अधिकारियों के ध्यान में लाई, जिसके बाद पर्ची जब्त कर ली गई।

मतगणना केंद्र की इस गड़बड़ पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा, "आज स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे घोषित हो रहे हैं। मतदान ईवीएम के बजाय मतपत्र पर हुआ है। तो आज हार हुई तो विपक्ष ठीकरा किस पर फोड़ेगा, मतपत्र पर, चुनाव आयोग पर या अपनी नाकामी पर?" उपाध्ये ने यह भी कहा कि नतीजा अनुकूल आए तो लोकतंत्र की जीत और खिलाफ जाए तो आरोपों की झड़ी लगाना, यह दोहरापन बंद होना चाहिए। उनकी सलाह थी कि विपक्ष हार के लिए नई वजहें खोजने के बजाय जनता का फैसला मानने की हिम्मत दिखाए।

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 30 उम्मीदवार मैदान में हैं और महायुति के भीतर मतभेदों की वजह से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के कौस्तुभ मुरलीधर गावडे महायुति के अधिकृत उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के जयंत आसगावकर महाविकास आघाडी के अधिकृत उम्मीदवार और मौजूदा विधायक हैं। सचिन सानप निर्दलीय हैं और उन्हें शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का समर्थन है। दत्तात्रय सावंत भी निर्दलीय हैं, जो पूर्व विधायक हैं और बागी उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे हैं।

पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 47 उम्मीदवार हैं। यहां चौतरफा या तिकोनी टक्कर है और महाविकास आघाडी में बगावत की वजह से वोट बंटने की संभावना है। भाजपा (महायुति) की ओर से डॉ. स्मिता योगेश जाधव, राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी (महाविकास आघाडी) की ओर से हर्षदा देशमुख-जाधव और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के बागी उम्मीदवार के रूप में सुनील मोदी चुनाव मैदान में हैं।

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