नागपुर पदवीधर सीट: कराले की दूसरी पसंद पलट गई बाजी, वंजारी 3,271 वोट से जीते
विधान परिषद चुनाव में अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराकर नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी।
नागपुर विभाग की विधान परिषद पदवीधर सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने दोबारा जीत हासिल कर ली है। उन्होंने भाजपा के सुधाकर कोहले (कुछ जगह कोहळे) को 3,271 वोट से हराया। वंजारी को पहली और दूसरी पसंद के वोट मिलाकर कुल 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले के खाते में 63,960 वोट आए। नतीजा 29 अक्टूबर को घोषित हुआ। निर्वाचन निर्णय अधिकारी और विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने वंजारी को जीत का प्रमाणपत्र सौंपा। परिवार के साथ पहुंचे वंजारी ने यह प्रमाणपत्र लिया।
गिनती मंगलवार 27 अक्टूबर की सुबह 8 बजे मानकापुर के विभागीय क्रीड़ा संकुल में 84 टेबल पर शुरू हुई थी और 41 घंटे से ज्यादा चली। (एक रिपोर्ट में यह वक्त करीब 45 घंटे बताया गया है।) चुनाव निरीक्षक डॉ. हर्षदीप कांबले, सभी जिलों के सहायक निर्वाचन अधिकारी यानी कलेक्टर और गिनती पर लगे कर्मचारी वहां मौजूद थे। निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी को कुल करीब 25 हजार 908 वोट मिले। (एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 25 हजार 909 बताया गया है।)
चुनाव का कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को घोषित किया था और 29 सितंबर को अधिसूचना जारी हुई। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुआ। इस सीट पर 2,55,603 मतदाता दर्ज थे, जिनमें से 1,65,672 ने वोट डाला। जिलों में चंद्रपुर में सबसे ज्यादा 73.05 प्रतिशत मतदान हुआ। गढ़चिरौली में 72.95, गोंदिया में 71.29, वर्धा में 68.35 और भंडारा में 67.07 प्रतिशत वोट पड़े। नागपुर जिले में सबसे कम, 60.35 प्रतिशत मतदान हुआ। कुल 445 मतदान केंद्रों से 788 मतपेटियां आई थीं। आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक खत्म करने का समय तय किया था।
गिनती की शुरुआत पोस्टल बैलेट से हुई। कुल 238 पोस्टल बैलेट में से 34 अवैध निकले और 204 वैध रहे। इनमें वंजारी को 101, कोहले को 86 और बाकी उम्मीदवारों को 17 वोट मिले। यानी वंजारी 15 वोट आगे रहे। कुल 38 उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए हर उम्मीदवार के लिए अलग डिब्बा और संदिग्ध मतपत्रों के लिए एक और डिब्बा, कुल 39 डिब्बे रखे गए थे। पहले मतपत्रों को 25-25 के गड्ढों में जमाया गया और असली गिनती दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई।
पहले राउंड में 84,003 वोटों की गिनती रात 8 बजे के आसपास पूरी हुई। इनमें 76,875 वैध और 7,128 अवैध निकले। वंजारी को 28,998, कोहले को 28,071 और कराले को 14,708 वोट मिले, यानी वंजारी 927 वोट आगे थे। इस बीच अनौपचारिक आंकड़े भी चल रहे थे। शुरुआती दौर में एक अनौपचारिक आंकड़ा वंजारी को 28,536, कोहले को 27,751 और कराले को 14,243 वोट दिखा रहा था, पर वह आधिकारिक नहीं था। आधी गिनती के वक्त वंजारी की सात से आठ हजार की बढ़त की चर्चा थी। शाम को सोशल मीडिया पर कोहले के 6,000 से आगे होने की खबर भी वायरल हुई। कराले ने खुद दावा किया था कि उन्हें पहले ही दौर में 40 से 45 हजार वोट मिलेंगे, जो सच नहीं निकला। उन्होंने एक मतपेटी से 8 मत ज्यादा निकलने पर आपत्ति जताई और चुनाव आयोग से नाराजगी जताकर कहा कि मतपत्रों से होने वाले चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित हो।
दूसरे राउंड में बाकी 81,909 वोटों की गिनती रात करीब साढ़े नौ बजे शुरू होकर बुधवार तड़के तक चली। इसमें कोहले को 32,853 और वंजारी को 27,632 वोट मिले। कराले के हिस्से 9,541 वोट आए। दो राउंड के बाद कोहले के कुल 60,924, वंजारी के 56,630 और कराले के 24,249 वोट हो गए। यानी कोहले 4,294 वोट आगे निकल गए। कुल पड़े 1,65,906 वोटों में से 15,032 अवैध और 1,50,874 वैध थे। इस हिसाब से जीत का कोटा 75,438 वोट तय हुआ, जिसे कोई नहीं छू सका। कोहले को कोटे तक पहुंचने के लिए 14,514 और वंजारी को 18,808 वोट चाहिए थे। बाकी उम्मीदवारों में संजय थुल को 3,091, सुमेध गडपायले को 1,096, मंगेश वानखेडे को 1,029, अतुल देशमुख को 921 और धनंजय बोरकर को 849 वोट मिले।
कोटा पूरा न होने पर एलिमिनेशन शुरू हुआ और दूसरी पसंद के वोट गिने जाने लगे। 28 उम्मीदवारों के बाहर होने तक कोहले 61,029 और वंजारी 56,785 पर थे, यानी कोहले 4,244 वोट आगे। 30 उम्मीदवारों के बाद यह बढ़त करीब 5,000 तक पहुंची। पूर्व विधायक अनिल सोले का मामला भी इसी बीच सामने आया। भाजपा में बगावत करने के बाद 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके घर गए थे और सोले ने कोहले को समर्थन देने की बात कही थी। पर उन्होंने नाम वापसी की आखिरी तारीख को नामांकन वापस नहीं लिया था, इसलिए मतपत्र पर उनका नाम बना रहा। उन्हें पहली पसंद के 267 और पोस्टल के 7, यानी कुल 274 वोट मिले। पहले राउंड में उन्हें 99 वोट मिलने की खबर भी थी। उनके वोटों में दूसरी पसंद कोहले को 88, वंजारी को 41 और कराले को 10 मिली।
फिर अंतिम तीन उम्मीदवारों के वोट गिने गए तो कोहले की बढ़त घटकर करीब 1,200 रह गई, जबकि कराले के लगभग 14,000 वोटों की गिनती बाकी थी। कराले के मतदाताओं की दूसरी पसंद बड़े पैमाने पर वंजारी को गई और बाजी पलट गई। बुधवार रात वंजारी की बढ़त साफ होने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न शुरू कर दिया। जीत की पुष्टि से पहले ही नारेबाजी हुई, माहौल तनावपूर्ण हुआ और पुलिस को दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं को हटाना पड़ा।
कोहले ने शुरू में हार मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने जश्न शुरू कर दिया है, लेकिन हमने हार नहीं मानी है।" उनका दावा था कि 36वें राउंड तक वे तीन हजार वोट से आगे थे और भाजपा के करीब नौ हजार वोट अवैध हो गए। उनके मुताबिक भाजपा के जिन मतदाताओं ने उनके नाम के आगे 1 की जगह 2 लिखा, उनसे वे विनती करते हैं कि लोकतंत्र के लिए ऐसा वोट देना ठीक नहीं। उन्होंने कहा, "पूरी गिनती खत्म होने तक हम हार नहीं मानेंगे।" गिनती के बीच उन्होंने कई वोट गलत तरीके से अवैध ठहराए जाने की बात कहकर उनकी दोबारा जांच की मांग की थी और गलत नतीजा आने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी थी। हार तय होने के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इसका विश्लेषण करेंगे और वे गिनती केंद्र से निकल गए। इन दावों पर सवाल भी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 3,000 से ज्यादा मतपत्रों पर कोहले के आगे सिर्फ '2' लिखा था और किसी को '1' नहीं मिला। यह भी चर्चा है कि करीब 15,000 वोट खारिज हुए। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कराले गुरुजी ने कहा, "भाजपा ने दो नंबर का वोट मांगा नहीं, यह उनके लिए घातक साबित हुआ।" उनके मुताबिक भाजपा के खिलाफ नाराजगी थी, इसलिए दो नंबर का वोट वंजारी को गया। उन्होंने यह भी कहा, "कराळे मास्टर कौन है, इसकी अब तक नोटिस नहीं ली गई, लेकिन अब कराळे मास्टर की नोटिस लेनी पड़ेगी।" उन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी बैलेट पेपर पर कराने की मांग की।
इस हार के बाद भाजपा के भीतर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी ने अपने गढ़ के मतदाताओं को गृहीत मान लिया, कार्यकर्ता बूथ-बूथ नहीं घूमे और पहली पसंद पर जरूरत से ज्यादा जोर रहा। कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बावजूद कोहले को टिकट दिया गया था। कोहले पिछले विधानसभा चुनाव में पश्चिम नागपुर से विकास ठाकरे के सामने हारे थे। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि आरएसएस मुख्यालय और फडणवीस व गडकरी के शहर में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा को हराया। उनके मुताबिक विधान परिषद की पांच में से तीन सीटें महाविकास आघाड़ी ने जीतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ट्वीट का भी जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया गया था।
वंजारी का जन्म 10 मई 1973 को नागपुर में हुआ। वे वकील हैं और उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दो बार दक्षिण नागपुर से विधायक रहे। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई की। 1998 से 2002 तक वे NSUI की महाराष्ट्र इकाई में महामंत्री रहे। 2020 में उन्होंने भाजपा के संदीप जोशी को 61,701 बनाम 42,791 वोट से, यानी 18,919 के अंतर से हराया था। उस वक्त 1978 के बाद पहली बार यह सीट कांग्रेस के पास आई थी। अब पांच सीटों के नतीजों में महाविकास आघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटें मिली हैं।
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